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इंटरनल पैनल, कंट्रोल रूम... अस्पतालों में आखिर हिंसा को कैसे रोकेगी केंद्र सरकार?

केंद्र सरकार ने अस्पतालों में हिंसा को रोकने के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को निर्देश जारी किए हैं. निर्देशों में अस्पतालों में चौबीसों घंटे मानवयुक्त सुरक्षा नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के लिए भी कहा है. ये निर्देश कोलकाता के आरजी कर मेडिकल अस्पताल एंड कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के बाद जारी किए हैं.

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इंटरनल यौन उत्पीड़न समिति का गठन करना, रात के समय ब्लॉकों और हॉस्टिल में रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सों की सुरक्षित आवाजाही का प्रावधान करना और हॉस्टिल कैंपस में सीसीटीवी कैमरों को लगाना... ये कुछ प्रमुख निर्देश हैं जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को जारी किए हैं.

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफ़डब्ल्यू) के सचिव अपूर्व चंद्रा ने 23 अगस्त को एक चिट्ठी भेजी. चिट्ठी में लिखा कि वे मेडिकल संस्थानों में हिंसक घटनाओं और बलात्कार-हत्या की घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों की ओर से हाल ही में किए गए विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं. उन्होंने लिखा कि जैसा कि आप जानते हैं, इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 20 और 22 अगस्त को अपना आदेश दिया था.

दो सप्ताह के अंदर उचित कार्रवाई करें

चिट्ठी में लिखा कि 22 अगस्त के आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने अन्य बातों के साथ-साथ निर्देश दिया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव, राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ मिलकर ये सुनिश्चित करेंगे कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश राष्ट्रीय कार्य बल (NTF) की रिपोर्ट प्राप्त होने तक कुछ बुनियादी न्यूनतम आवश्यकताओं को लागू करें. इसमें कहा गया है कि इसने राज्य सरकारों को ये भी निर्देश दिया है कि वे इसके बाद 2 सप्ताह के भीतर स्थिति की आवश्यकताओं को देखते हुए उपचारात्मक और उचित कार्रवाई करें.

चंद्रा ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कुछ तत्काल कदम उठाए जा सकते हैं. इनमें सीनियर डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करते हुए 'अस्पताल सुरक्षा समिति' और 'हिंसा रोकथाम समिति' का गठन शामिल है, ताकि उचित सुरक्षा उपायों की रणनीति बनाई जा सके और उन्हें लागू किया जा सके. 

चंद्रा ने अस्पतालों में चौबीसों घंटे मानवयुक्त सुरक्षा नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के लिए भी कहा. उन्होंने लिखा कि अस्पताल में यौन उत्पीड़न पर आंतरिक समिति का गठन और अस्पताल परिसर के अंदर सभी सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का जायजा लेना भी शामिल है. नाइट शिफ्ट के दौरान विभिन्न ब्लॉकों और छात्रावास भवनों और अस्पताल के अन्य क्षेत्रों में रेजिडेंट डॉक्टरों/नर्स की सुरक्षित आवाजाही का प्रावधान, आवासीय, छात्रावास ब्लॉकों और अन्य अस्पताल परिसरों के सभी क्षेत्रों के अंदर उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना और रात के दौरान अस्पताल परिसर में नियमित सुरक्षा गश्त करना निर्देशों में शामिल है.