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खेलने-पढ़ने की उम्र में ही ब्याही गईं देश की 20 करोड़ लड़कियां, UN की रिपोर्ट में खुलासा

UN Report On Marriage: संयुक्त राष्ट्र की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 20 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी बचपन में ही कर दी गई थी. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर ग्लोबल लेवल पर बात की जाए तो ये आंकड़ा 64 करोड़ से ज्यादा है. ये भी कहा गया है कि पिछली तिमाही सदी में अलग-अलग प्रयासों के जरिए 6 करोड़ से अधिक बाल विवाहों को रोका गया है.

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India Daily Live

UN Report On Marriage: संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में 200 मिलियन यानी 20 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी उनके बचपन में ही कर दी गई थी. ग्लोबल लेवल के आंकड़े और चौंकाने वाले हैं. इसके मुताबिक, 640 मिलियन यानी 64 करोड़ लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले कर दी गई थी, इनमें से एक तिहाई मामले अकेले भारत में हुए हैं.

सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) रिपोर्ट 2024 के अनुसार, पांच में से एक लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है, जबकि 25 साल पहले ये संख्या 4 में से 1 थी. अलग-अलग सुधारों ने पिछली तिमाही सदी में करीब 68 मिलियन यानी 6 करोड़ से ज्यादा बाल विवाहों को रोका है.

सुधारों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दुनिया लैंगिक समानता (Gender Equality) के मामले में पीछे रह गई है. महिलाओं के खिलाफ हिंसा और कई महिलाओं के लिए यौन और प्रजनन स्वास्थ्य जैसे मुद्दे बने हुए हैं. वर्तमान गति से, पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता हासिल करने में 176 साल लगेंगे.

पटरी से उतर गए सुधार प्रयासों के सारे उपाय?

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि वैश्विक जीवन स्थितियों में सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से निर्धारित 169 लक्ष्यों में से केवल 17% ही 2030 की समयसीमा तक पूरे होने की राह पर हैं. 2015 में विश्व नेताओं की ओर से अपनाए गए इन लक्ष्यों का उद्देश्य गरीबी को समाप्त करने से लेकर लैंगिक समानता प्राप्त करने तक कई तरह के मुद्दों को संबोधित करना है. हालांकि, इनमें से लगभग आधे लक्ष्यों की गति या तो धीमी है या फिर मध्यम गति से चल रही है. एक तिहाई से अधिक तो रुके हुए हैं या पीछे हट रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि इसका निष्कर्ष सरल है. शांति सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन का सामना करने और अंतरराष्ट्रीय वित्त को बढ़ावा देने में हमारी विफलता विकास को कमजोर कर रही है. गुटेरेस ने रिपोर्ट में कुछ उम्मीद की किरणें देखी हैं, लेकिन 2030 एजेंडा को पूरा करने के लिए तत्काल और त्वरित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर भी दिया है.