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ईरान जंग के बीच ट्रंप ने पीएम मोदी को मिलाया फोन, होर्मुज पर बनी महत्वपूर्ण रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में जारी स्थिति पर चर्चा की. होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला बनाए रखने पर भी सहमति बनी. यह बातचीत ईरान युद्ध के बीच हुई है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने और सुरक्षित बनाने पर गहन मंथन किया. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर संकट मंडरा रहा है. भारत ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज में किसी भी प्रकार का अवरोध स्वीकार्य नहीं है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुई इस बातचीत की आधिकारिक पुष्टि भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने 'एक्स' पर की है. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मध्य-पूर्व की ताजा स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के महत्व पर विस्तृत चर्चा हुई. 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद यह पहला मौका है जब दोनों शीर्ष नेता सीधे संपर्क में आए हैं. यह कॉल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक धमनियों में से एक है. ट्रंप ने हाल ही में इसे खुला रखने के लिए सख्त अल्टीमेटम दिया था. यदि यह रास्ता बंद होता है तो इसका सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है. पीएम मोदी ने भी संसद के दोनों सदनों में स्पष्ट कर दिया है कि कर्मशियल जहाजों और नागरिकों पर होने वाले हमलों को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा.

शांति और स्थिरता पर भारत का रुख 

पीएम मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर अपना संदेश साझा करते हुए कहा कि भारत हमेशा से तनाव कम करने और जल्द शांति बहाली का पक्षधर रहा है. उन्होंने जोर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट का सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के हित में है. भारत और अमेरिका इस मुद्दे पर निरंतर एक-दूसरे के संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं. भारत इस युद्ध में एक संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हुए वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित कर रहा.

ईरान के साथ भारत का संपर्क 

जंग के बीच भारत केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ईरान के साथ भी सक्रिय कूटनीति कर रहा है. पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से पहले ही संवाद किया था, जिसके कारण कुछ भारतीय टैंकरों को होर्मुज के रास्ते सुरक्षित आने की अनुमति मिल सकी. भारत का मुख्य उद्देश्य अपने शिपिंग रूट और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है. भारत डायरेक्ट संपर्क के जरिए अपने हितों की रक्षा कर रहा है और युद्ध के बीच समन्वय बिठाने की कोशिश कर रहा है.

ईरान में नेतृत्व का संकट और युद्ध के परिणाम 

ईरान युद्ध को शुरू हुए लगभग एक महीना बीत चुका है. 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों ने ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है. रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई कद्दावर नेताओं की मौत हो गई है. इस भारी क्षति के बाद ईरान में नेतृत्व का संकट गहरा गया है. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या ट्रंप और मोदी की यह पहल युद्ध विराम की राह खोलेगी?