केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थॉमस कुथिरावत्तम का 80 साल की उम्र में हुआ निधन

केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद थॉमस कुथिरावत्तम का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे पार्टी संगठन, संसद और सामाजिक कार्यों में लंबे समय तक सक्रिय रहे.

social media
Kuldeep Sharma

केरल की राजनीति में दशकों तक सक्रिय रहे केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद थॉमस कुथिरावत्तम का सोमवार को निधन हो गया. उन्होंने चेंगनूर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण उनका स्वास्थ्य कुछ समय से कमजोर चल रहा था. संसद से लेकर पार्टी संगठन और सामाजिक संस्थाओं तक, उनका योगदान केरल की राजनीति में एक सशक्त अध्याय के रूप में याद किया जाएगा.

राजनीति में लंबा और प्रभावशाली सफर

थॉमस कुथिरावत्तम केरल कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया. अविभाजित केरल कांग्रेस में वे लंबे समय तक महासचिव और कार्यकारी अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहे. 1970 के दशक में वे केरल कांग्रेस (एम) के प्रमुख प्रवक्ता के रूप में उभरे और के. एम. मणि के करीबी सहयोगी माने जाते थे.

राज्यसभा में निभाई अहम भूमिका

1985 से 1991 तक थॉमस कुथिरावत्तम केरल कांग्रेस (एम) का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य रहे. इस दौरान वे कई संसदीय समितियों का हिस्सा बने. बहुचर्चित बोफोर्स सौदे की जांच करने वाली संयुक्त संसदीय समिति में उनकी भूमिका को खास तौर पर याद किया जाता है. संसद में वे स्पष्ट विचारों और संतुलित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे.

छात्र राजनीति से जनआंदोलनों तक

उनका सार्वजनिक जीवन बहुत कम उम्र में शुरू हो गया था. मात्र 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने विमोचन समरम में भाग लिया. छात्र राजनीति के जरिए वे केरल स्टूडेंट्स यूनियन में सक्रिय हुए. एक प्रधानाचार्य को हटाने के खिलाफ आंदोलन से वे चर्चा में आए और नेतृत्व क्षमता के कारण तेजी से आगे बढ़े.

चुनावी मैदान में प्रयास और संघर्ष

1980 में उन्होंने चेंगनूर से विधानसभा चुनाव लड़ा. 1991 में मावेलिक्करा से और 1996 में पथानापुरम से भी उन्होंने चुनावी किस्मत आजमाई, हालांकि सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद वे संगठनात्मक राजनीति में लगातार सक्रिय रहे और युवाओं को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई.

सामाजिक और धार्मिक सेवाओं में योगदान

2010 के बाद थॉमस कुथिरावत्तम ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर सामाजिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया. वे 25 वर्षों तक मलनकारा ऑर्थोडॉक्स चर्च की मैनेजिंग कमेटी के सदस्य रहे. इसी दौरान चेंगनूर डायोसिस की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हुई. वे चर्च की आर्द्रा चैरिटेबल सोसायटी के कोषाध्यक्ष भी रहे.

थॉमस कुथिरावत्तम अपने पीछे पत्नी लिसी थॉमस, चार बच्चों और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनके अंतिम संस्कार की जानकारी बाद में दी जाएगी.