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Pune Porsche crash: 'नशे में नहीं होश में चलाई थी गाड़ी, बेटे के बाद बाप को लेकर बड़ा खुलासा', थम नहीं रहा ट्विस्ट का सिलसिला

Pune Porsche crash: पुणे में हुए दिल दहलाने देने वाले एक्सीडेंट में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. इसी फेहरिस्त में शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर ने दावा किया है कि उनके पास पुणे पोर्श दुर्घटना मामले में कथित रूप से शामिल नाबालिग के पिता के खिलाफ अपने दावे को साबित करने के लिए सबूत हैं.

India Daily Live

Pune Porsche crash: पुणे में हुए भयानक पोर्श कार एक्सीडेंट मामले में अब पुलिस कमिश्नर ने दावा किया है कि दुर्घटना मामले में कथित तौर पर शामिल नाबालिग के पिता के खिलाफ सबूत मिटाने का मामला दर्ज करने का विकल्प तलाश रही है. इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने यह भी दावा किया कि पुलिस के पास सबूत हैं कि वो ये दिखाने का प्रयास कर रहे थे कि गाड़ी उनका बेटा नहीं बल्कि कार में मौजूद फैमिली ड्राइवर चला रहा था.

पिता ने की थी सबूत मिटाने की कोशिश

पत्रकारों से बात करते हुए कमिश्नर अमितेश कुमार ने कहा कि जांच दल की ओर से एकत्र किए गए सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि शहरे के बड़े बिल्डर का बेटा ही पोर्श कार चला रहा था जिसने रविवार की सुबह लगभग 2.30 बजे कल्याणी नगर जंक्शन पर दो आईटी इंजीनियरों को कुचल दिया था. उन्होंने कहा कि उनकी जांच से यह भी पता चला है कि पोर्शे टायकन में नाबालिग लड़के सहित चार लोग मौजूद थे.

उन्होंने कहा,'पुणे शहर पुलिस की जांच से पता चला है कि दुर्घटना के बाद, नाबालिग लड़के के पिता ने यह दिखाने का प्रयास किया कि पोर्श कार का चालक उनका नाबालिग बेटा नहीं, बल्कि एक वयस्क चला रहा था जो कि फैमिली ड्राइवर भी है. हमने पोर्शे कार चलाने के लिए फैमिली ड्राइवर का बयान दर्ज कर लिया है और इस मामले में ड्राइवर का बयान बेहद अहम है.'

नशे में नहीं होश में चलाई थी गाड़ी

पुलिस ने यह भी दावा किया कि हमने नाबालिग के घर के सिक्योरिटी केबिन और सीसीटीवी के रिकॉर्ड की जांच की है, जिससे पता चलता है कि घर से निकलते समय वह कार ले गया था. साथ ही घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों के बयान भी इस तकनीकी सबूत की पुष्टि करते हैं.

नाबालिग के पिता को शुक्रवार दोपहर को अदालत में पेश किया जाना है क्योंकि विशेष अदालत की ओर से पहले पुलिस को दी गई तीन दिन की पुलिस हिरासत शुक्रवार को समाप्त हो रही है. पुलिस पिता की हिरासत बढ़ाने की मांग कर सकती है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अमितेश कुमार ने एक दिन पहले कही गई बात दोहराई कि नाबालिग ने शराब के नशे में अपराध नहीं किया, बल्कि "पूरे होश में था". उन्होंने कहा कि ब्लड रिपोर्ट कोई मायने नहीं रखती है और उन्हें लगता है कि नाबालिग को पता था कि शराब पीने और फिर एक संकरी गली में तेज गति से कार चलाने से लोगों की जान जा सकती है.

उन्होंने कहा,'गिरफ्तार करने के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए ससून अस्पताल ले जाया गया. यहां सुबह करीब 11 बजे उनके खून के नमूने लिए गए. ब्लड सैंपल लेने के समय में चूक हो रही है. लेकिन धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत हमारा मामला ब्लड रिपोर्ट पर निर्भर नहीं है... यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस रक्त रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है, एहतियात के तौर पर डीएनए नमूने के लिए शाम को एक और ब्लड सैंपल लिया गया था.'

पुलिस ने यह भी कहा है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि नाबालिग लड़के ने शराब पी थी, जिसमें सीसीटीवी फुटेज और दो रेस्तरां के बिल भी शामिल हैं, जहां वह दुर्घटना से पहले कथित तौर पर अपने दोस्तों के साथ शराब पी रहा था.

आपको बता दें कि पुणे पोर्श एक्सीडेंट में पहले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने लड़के को निबंध लिखने की शर्त पर 15 दिन की जमानत दे दी थी लेकिन जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है.