विजय को रोकने के लिए साथ आएंगे DMK और AIADMK, सत्ता के लिए दो धुर विरोधी मिलाएंगे हाथ!
तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी गहमागहमी के बीच राज्य में डीएमके और एआईएडीएमके जैसी धुर विरोधी पार्टियों के गठबंधन की अटकलें लग रही है. अगर ऐसा होता है तो ये तमिलनाडु ही नहीं बल्कि देश की राजनीति के लिए चौकाने वाली घटना होगी.
नई दिल्ली: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य में एक अभूतपूर्व राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके को सबसे अधिक सीटें मिली हैं, लेकिन सत्ता की चाबी अभी भी बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर है. राजभवन में सरकार बनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन पर्याप्त विधायकों का समर्थन न होने से पेंच फंस गया है. राज्य की राजनीति में अब धुर विरोधी दलों के बीच चौंकाने वाले गठबंधन की अटकलें जोर पकड़ रही हैं.
टीवीके प्रमुख विजय ने राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है. उन्होंने 112 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा, जबकि 234 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 118 की जरूरत है. राज्यपाल ने उनसे 118 विधायकों की सूची मांगी, जिसके लिए विजय ने कुछ और समय लिया है. विजय स्वयं दो सीटों पर जीते हैं, और एक सीट छोड़ते ही उनका संख्याबल और कम हो जाएगा. कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया है, लेकिन बहुमत अभी दूर है.
डीएमके और एआईएडीएमके की निकटता
तमिलनाडु की सियासत में सबसे चौंकाने वाली खबर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच संभावित गठबंधन की है. चुनाव में डीएमके ने 59 और एआईएडीएमके ने 47 सीटें जीती हैं. यदि ये दोनों धुर विरोधी दल हाथ मिलाते हैं, तो उनका कुल आंकड़ा 106 तक पहुंच जाएगा. हालांकि, यह भी बहुमत के आंकड़े 118 से 12 कदम पीछे है.
वीसीके की बदली रणनीति और इनकार
वीसीके, जिसने डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, टीवीके के खेमे में जाने की अटकलों के बीच थी. सरकार बनाने में अपनी भूमिका तय करने के लिए वीसीके ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी. लेकिन डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट के बाद पार्टी ने अपनी बैठक अचानक रद्द कर दी है. इसके अलावा, वामपंथी दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी विजय की टीवीके को समर्थन देने के किसी भी प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
एआईएडीएमके का रुख और शपथ ग्रहण
एआईएडीएमके ने आधिकारिक तौर पर टीवीके को समर्थन देने की सभी खबरों को निराधार और सरासर झूठा बताया है. पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि वे विजय की सरकार बनाने में कोई मदद नहीं कर रहे हैं. इस राजनीतिक खींचतान के बीच, विजय के सात मई को होने वाले प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह पर संकट के बादल छा गए हैं. पर्याप्त संख्याबल के अभाव में अब इस कार्यक्रम के टलने की पूरी संभावना है. राज्यपाल के अगले कदम पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
गठबंधन और निर्दलीयों की भूमिका
अब सबकी नजरें उन अन्य दलों और विधायकों पर हैं जो इस त्रिशंकु विधानसभा में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं. चाहे वह टीवीके हो या डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन, दोनों को सरकार बनाने के लिए अन्य निर्दलीयों या छोटी पार्टियों के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होगी. तमिलनाडु में एक स्थिर सरकार का गठन फिलहाल एक बड़ी पहेली बना हुआ है. आने वाले कुछ दिन राज्य की भावी सत्ता और नए नेतृत्व का फैसला करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं.