देश में बढ़ रहे H1N1 के मामले, जानिए नया स्ट्रेन आया या पुराना वायरस ही फैला रहा संक्रमण?
देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले बढ़ रहे हैं. कर्नाटक में 4 हजार से ज्यादा केस सामने आने की बात कही गई है, जबकि दिल्ली में भी 1700 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं.
Swine Flu: देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले बढ़ रहे हैं. कर्नाटक में 4 हजार से ज्यादा केस सामने आने की बात कही गई है, जबकि दिल्ली में भी 1700 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान और एनसीआर के कई इलाकों में भी फ्लू के मामले बढ़ने की खबर है.
बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या इस बार स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन आया है? हालांकि, ICMR के अनुसार, भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है. यानी इस बार भी संक्रमण पुराने H1N1 वायरस से ही हो रहा है.
क्या भारत में आया है स्वाइन फ्लू का नया स्ट्रेन?
बढ़ते मामलों के बावजूद अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि भारत में स्वाइन फ्लू का नया स्ट्रेन फैल रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, H1N1 वायरस पहले से ही लोगों के बीच मौजूद है और समय-समय पर इसके मामले बढ़ते रहते हैं. इसलिए केवल केस बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि वायरस का नया रूप आ गया है. इसके पीछे मौसम में बदलाव और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता जैसे कई कारण हो सकते हैं.
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हर कुछ साल में क्यों बढ़ते हैं H1N1 के मामले?
भारत में स्वाइन फ्लू के मामले पहले भी कई बार तेजी से बढ़ चुके हैं. साल 2009 में देश में H1N1 का पहला मामला सामने आया था. इसके बाद 2009-10 की सर्दियों में संक्रमण के मामले काफी बढ़े. इसके बाद 2014-15 के दौरान भी स्वाइन फ्लू का बड़ा प्रकोप देखने को मिला. साल 2019 में भी मामलों में तेजी आई थी. अब 2026 में एक बार फिर H1N1 के मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक कारण लोगों की इम्यूनिटी में समय के साथ होने वाला बदलाव हो सकता है.
इम्यूनिटी का क्या है रोल?
कुछ डॉक्टर्स के अनुसार, H1N1 वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. यह लोगों के बीच मौजूद रहता है और समय-समय पर संक्रमण के मामले सामने आते हैं. जब बड़ी संख्या में लोग किसी वायरस से संक्रमित होते हैं तो उनके शरीर में उससे लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है. कुछ समय तक इससे संक्रमण की रफ्तार कम रह सकती है. लेकिन समय बीतने के साथ लोगों में बनी प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है. ऐसे में वायरस को दोबारा फैलने का मौका मिल सकता है और मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
मौसम भी बढ़ा सकता है फ्लू का खतरा:
मौसम में बदलाव भी फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी का एक कारण हो सकता है. बारिश, उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव के दौरान वायरल संक्रमण तेजी से फैल सकता है. इसके अलावा ऑफिस, स्कूल, मेट्रो, बस और दूसरे बंद स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग एक-दूसरे के करीब रहते हैं. अगर किसी व्यक्ति को फ्लू है और वह खांसता या छींकता है, तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है.
लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए. खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक ढकना, हाथों की साफ-सफाई रखना और बीमार होने पर दूसरों से उचित दूरी बनाए रखना संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद कर सकता है. बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.