TMC से अलग होकर दूसरी पार्टी से जुड़ने वाले सांसदों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सांसदों से अपना पक्ष रखने को कहा है.
अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर लोकसभा अध्यक्ष को दलबदल विरोधी कानून के तहत दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी. उनका आरोप है कि सांसदों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई पर फैसला लेने में अनावश्यक देरी हो रही है.
बनर्जी ने पहले 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं. इसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इन मामलों का जल्द निपटारा करने का आग्रह किया. बताया गया है कि 27 जुलाई को लिखित रूप से याद दिलाने के बाद उन्होंने 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात भी की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और लोकसभा महासचिव को अलग से नोटिस जारी करने की मांग स्वीकार नहीं की. अदालत में सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए.
यह विवाद टीएमसी के संसदीय दल में हुई बगावत के बाद सामने आया. पार्टी के कई लोकसभा सांसदों ने टीएमसी से अलग होकर त्रिपुरा स्थित राजनीतिक संगठन नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़ने या उसके साथ विलय की घोषणा की. इन सांसदों ने लोकसभा में अलग दल के रूप में मान्यता देने की मांग भी की. टीएमसी का तर्क है कि इन सांसदों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता था. ऐसे में किसी दूसरे राजनीतिक संगठन से जुड़ना पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के समान माना जा सकता है. पार्टी ने इसी आधार पर दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की है.
मिली जानकारी के मुताबिक बागी सांसदों की सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, सायोनी घोष, खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बैग, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक के नाम शामिल हैं.