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LoC पार कर पाकिस्तान गए सैफुल्लाह, कश्मीर के लिए उठाई बंदूक; अब आतंकवाद छोड़कर युवाओं को दिया संदेश

मोहम्मद फारूक खान उर्फ सैफुल्लाह 1989 में LoC पार कर पाकिस्तान गया और आतंकवादी प्रशिक्षण लेकर कश्मीर लौटा था. बाद में एक कश्मीरी की हत्या देखने के बाद उसका आतंकवाद से मोहभंग हुआ.

India daily
Km Jaya

श्रीनगर: 1989 में एक युवा कश्मीरी नियंत्रण रेखा यानी LoC पार कर पाकिस्तान चला गया था. उसे विश्वास था कि वह कश्मीर के लिए संघर्ष करने जा रहा है. पाकिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण लेने के बाद वह कश्मीर लौटा, लेकिन समय के साथ उसका विश्वास बदल गया. यही युवक बाद में कई साल जेल में रहा और अंततः मुख्यधारा की राजनीति में शामिल हो गया.

मोहम्मद फारूक खान उर्फ सैफुल्लाह ने इंडिया डेली के साथ बातचीत में कश्मीर में आतंकवाद के दौर से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं. उन्होंने आतंकवादी संगठनों के काम करने के तरीके, उनके बीच की प्रतिद्वंद्विता और उस दौर में आम लोगों की कीमत पर भी बात की.

सैफुल्लाह ने क्या किया दावा?

सैफुल्लाह का दावा है कि पाकिस्तान ने अलग-अलग आतंकवादी संगठनों को सक्रिय रखा. इनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठन शामिल थे. उनका आरोप है कि अलग-अलग नेटवर्क बनाए रखने का उद्देश्य यह था कि किसी एक संगठन का नेटवर्क कमजोर होने पर पूरा आतंकवादी ढांचा खत्म न हो.


उन्होंने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी JKLF और हिज्बुल मुजाहिदीन के बीच संघर्ष का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, दोनों संगठनों की विचारधारा और कश्मीर को लेकर अलग-अलग लक्ष्य थे. इसके कारण आतंकवाद के दौर में गुटों के बीच भी हिंसक टकराव हुआ.

उनके जीवन में कब आया बदलाव?

सैफुल्लाह के जीवन में निर्णायक बदलाव तब आया, जब उन्होंने एक आम कश्मीरी की हत्या देखी. उनके मन में सवाल उठा कि अगर बंदूक कश्मीर के लिए उठाई गई है, तो उसका निशाना कश्मीरी ही क्यों बन रहे हैं. इसी घटना ने उन्हें सशस्त्र संघर्ष के रास्ते पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया.

उनका दावा है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर LoC के पार से आतंकियों को निर्देश देते थे. उनका यह भी कहना है कि स्थानीय युवाओं की भर्ती कम होने के बाद पाकिस्तान से आए आतंकियों की भूमिका बढ़ने लगी.

कश्मीरी युवाओं के बारे में क्या बताया?

सैफुल्लाह ने उन कश्मीरी युवाओं का भी जिक्र किया, जो वर्षों पहले पाकिस्तान चले गए थे. उनका दावा है कि कई लोग आज भी मुश्किल परिस्थितियों में वहां रह रहे हैं और अपने परिवारों से दूर हैं. वह इसे इस्तेमाल करो और छोड़ दो की रणनीति बताते हैं.

पूर्व आतंकवादियों की वापसी के दौरान हथियारों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए. उनका कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को यह पता लगाना चाहिए कि कश्मीर लाई गई हथियारों की खेप का बाद में क्या हुआ.

सैफुल्लाह ने आज बंदूक उठाने वाले युवाओं से हिंसा छोड़ने की अपील की है. उनका कहना है कि बंदूक अंत में व्यक्ति, उसके परिवार और भविष्य को नुकसान पहुंचाती है.

अपनी यात्रा के बारे में क्या बताया?

उनकी यात्रा 1989 में LoC पार करने वाले एक युवा से शुरू हुई और जेल से होते हुए मुख्यधारा की राजनीति तक पहुंची. वह आज अपने अनुभव के आधार पर युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़ने की सलाह देते हैं.

सैफुल्लाह के सभी आरोप और दावे उनके अपने बयान हैं. इंडिया डेली की रिपोर्ट के अनुसार इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है.