सूरत में पहली ही टेस्टिंग में टूट गया नया पानी का टैंक, 21 करोड़ की लागत से हुआ था निर्माण-VIDEO
सूरत के ताड़केश्वर इलाके में 21 करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी पहली बार पानी भरते ही ढह गई. इस हादसे ने निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
नई दिल्ली: गुजरात के सूरत शहर में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. ताड़केश्वर इलाके में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई एक नई पानी की टंकी उद्घाटन से पहले ही गिर गई. इस हादसे में जहां तीन मजदूर घायल हुए, वहीं आसपास का इलाका जलमग्न हो गया. घटना के बाद निर्माण में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप तेज हो गए हैं. विपक्ष ने इसे सरकार की कार्यशैली का उदाहरण बताया है.
ताड़केश्वर इलाके में बनी इस पानी की टंकी की क्षमता करीब 11 लाख लीटर बताई जा रही थी. राज्य के जल आपूर्ति विभाग की ओर से इसका निर्माण कराया गया था और यह बीते तीन वर्षों से बन रही थी. उद्घाटन से पहले जब इसकी टेस्टिंग की गई और लगभग 9 लाख लीटर पानी भरा गया, तो कुछ ही देर में जोरदार धमाके के साथ पूरी टंकी ढह गई.
घायल मजदूर और जलमग्न इलाका
टंकी गिरने की घटना में वहां काम कर रहे तीन मजदूर घायल हो गए. उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. हादसे के बाद तेज बहाव के साथ पानी आसपास की सड़कों और घरों में भर गया. कुछ समय के लिए पूरा इलाका जलमग्न हो गया और अफरा तफरी का माहौल बन गया. स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी देखी गई.
भ्रष्टाचार के आरोप तेज
घटना के बाद टंकी के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे. स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर निर्माण कार्य सही तरीके से हुआ होता, तो पहली ही टेस्टिंग में यह ढह नहीं सकती थी. 21 करोड़ रुपये की लागत से बनी टंकी का इस तरह गिर जाना सरकारी निगरानी और गुणवत्ता जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
अहमदाबाद की पुरानी टंकी का जिक्र
इस घटना से कुछ दिन पहले अहमदाबाद में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली थी. वहां करीब 70 साल पहले बनी पानी की टंकी को गिराने के लिए जेसीबी मशीन का सहारा लेना पड़ा था. उस टंकी को तोड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. अब सूरत की नई टंकी के गिरने की घटना की तुलना उसी पुराने ढांचे से की जा रही है.
कांग्रेस का भाजपा पर हमला
सूरत की घटना को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 21 करोड़ रुपये की लागत से बनी टंकी पहली बार पानी भरते ही टूट गई, जो भाजपा के भ्रष्टाचार मॉडल की झलक है. एक अन्य पोस्ट में कहा गया कि कांग्रेस के समय बनी टंकी 70 साल बाद भी जेसीबी से तोड़नी पड़ी, जबकि भाजपा का बनाया टैंक उद्घाटन से पहले ही ढह गया. यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर रहा है.