बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए लाखों लोगों को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम मताधिकार देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए लाखों लोगों को अंतरिम राहत देने से इनकार किया. अदालत ने कहा कि जल्दबाजी में फैसले से प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है.
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में इस विवाद ने गंभीर रूप ले लिया, जहां लाखों प्रभावित मतदाताओं को अंतरिम तौर पर वोट देने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया. अदालत ने साफ किया कि चुनाव से ठीक पहले किसी भी जल्दबाजी में लिया गया फैसला पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने साफ तौर पर कहा कि वह ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहती जिससे अपीलीय ट्रिब्यूनल पर अत्यधिक दबाव पड़े. अदालत को बताया गया कि 11 अप्रैल तक पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 34 लाख से अधिक अपीलें दायर हो चुकी हैं. इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए अदालत ने चिंता जताई कि अगर जल्दबाजी में फैसले लिए गए, तो त्रुटियां होने की संभावना बढ़ सकती है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को संतुलित रखना जरूरी है.
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत में जोरदार पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि लाखों लोग खुद को वैध मतदाता मानते हैं और वे अपने मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहते हैं. बनर्जी ने अदालत से आग्रह किया कि जितनी संभव हो सके उतनी अपीलों का निपटारा मतदान से पहले किया जाए. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रभावित मतदाताओं के लिए एक पूरक मतदाता सूची जारी की जा सकती है, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें.
अधिकार और प्रक्रिया के बीच संतुलन
पीठ ने इस मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही. न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला ने कहा कि अदालत मतदाताओं के अधिकार और सत्यापन की जरूरत के बीच एक ‘मध्य मार्ग’ निकालने की कोशिश करेगी. वहीं, न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि नियमों में पहले से ही अपील का प्रावधान मौजूद है और यदि कोई अपील स्वीकार होती है, तो संबंधित अधिकारी तुरंत मतदाता सूची में संशोधन कर सकते हैं. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने विशेष अधिकारों का उपयोग कर सकती है.
चुनाव आयोग और अन्य चिंताएं
चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि चुनाव के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप देने और संशोधन की प्रक्रिया अलग-अलग ढांचे के तहत होती है, जिससे अंतिम समय में बदलाव करना मुश्किल हो जाता है. वहीं, वरिष्ठ वकील वी. गिरी ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने की मांग की. अदालत अब इस मामले पर विचार कर रही है और जल्द ही कोई संतुलित फैसला आने की संभावना है, जिससे मतदाताओं और प्रक्रिया दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.