तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? CJP प्रोटेस्टर को नोटिस दिए जाने पर ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट पर बरसे सीजेआई

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस जारी करने पर ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाई है और प्राधिकरण से जवाब मांगा है.

ANI
Sagar Bhardwaj

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एक एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताया. कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले एक छात्र को नोटिस जारी किया गया था. इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आदेश के बावजूद मजिस्ट्रेट ने ऐसी हिमाकत कैसे की?

5 लाख रुपये के बॉन्ड का मामला

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर 4 सितंबर को नोटिस भेजा गया था. इसमें छात्र पर आरोप लगाया गया कि वह छात्रों को सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए भड़का रहा है. शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर उससे 5 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड की मांग की गई थी. हालांकि बाद में पुलिस ने इस नोटिस को वापस ले लिया था.

अदालत के आदेश का उल्लंघन

वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने अदालत में इस मुद्दे को उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताया. उन्होंने कहा कि नोटिस वापस ले लेने से कोर्ट की तौहीन का अपराध खत्म नहीं हो जाता. 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शनों में शामिल छात्रों पर दर्ज सभी FIR रद्द कर दी थीं और दंडात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.


प्राधिकरण से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता को सभी तथ्य और नोटिस को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से लिखित स्पष्टीकरण मांगेगी, क्योंकि युवाओं के खिलाफ इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

NEET धांधली से जुड़ा था प्रदर्शन

CJP का यह 36 दिनों का विरोध प्रदर्शन NEET परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ था. 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुई थीं. तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा मांगें मान लिए जाने के बाद यह आंदोलन समाप्त हुआ था.