450 रुपये किलो चीनी! भारत के इस राज्य में महंगाई से बढ़ी लोगों की मुश्किलें
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हाईवे नाकेबंदी के कारण जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसके चलते चीनी की कीमत 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है.
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के पहाड़ी जिलों में जरूरी सामान की भारी किल्लत के चलते आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. कांगपोकपी जिले में चीनी की कीमत 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है. इसके अलावा पेट्रोल, एलपीजी सिलेंडर और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम भी कई गुना बढ़ गए हैं.
कांगपोकपी में कई हफ्तों से जारी हाईवे नाकेबंदी का सीधा असर जरूरी सामान की सप्लाई पर पड़ा है. इलाके की निर्भरता मुख्य रूप से NH-2 और NH-37 पर है. ये दोनों राष्ट्रीय राजमार्ग कांगपोकपी को इंफाल, नागालैंड के दीमापुर और असम से जोड़ते हैं. नाकेबंदी के कारण ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने से पहाड़ी इलाकों में सामान पहुंचना मुश्किल हो गया है.
क्यों बढ़े चीनी और दूसरी चीजों के दाम?
नाकेबंदी के कारण स्थानीय बाजारों में सामान की उपलब्धता कम हो गई है. सप्लाई घटने के साथ ही जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है. वहीं पेट्रोल की कीमत करीब 250 रुपये प्रति लीटर और 50 किलो चावल की बोरी करीब 3,000 रुपये तक पहुंच गई है.
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एलपीजी सिलेंडर की कमी भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है. यहां एक सिलेंडर के लिए लोगों को करीब 5,000 से 6,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने पर कुछ परिवार लकड़ी जलाकर खाना बनाने को मजबूर हैं.
नाकेबंदी के पीछे क्या वजह है?
दिए गए विवरण के मुताबिक, ताजा नाकेबंदी मई 2026 में कांगपोकपी इलाके में तीन थाडौ समुदाय के पादरियों की हत्या के बाद बढ़े तनाव के बीच शुरू हुई. इसके बाद कुकी और नागा समुदायों के बीच पहले से मौजूद जातीय तनाव और गहरा गया. इसी माहौल में हाईवे पर नाकेबंदी की स्थिति बनी.
मणिपुर में हाईवे नाकेबंदी का असर पहले भी जरूरी सामान की सप्लाई पर पड़ता रहा है. राज्य के पहाड़ी इलाकों में सड़क मार्ग से आने वाली आपूर्ति बाधित होने पर स्थानीय बाजारों में कीमतें तेजी से बढ़ने की समस्या सामने आती रही है.
प्रशासन कर रहा सप्लाई बहाल करने की कोशिश
स्थानीय संगठनों और सिविल सोसाइटी समूहों की ओर से केंद्र और राज्य सरकार से हाईवे खोलने की अपील की जा रही है. सुरक्षा बलों की मदद से कुछ ट्रकों को सुरक्षा घेरे में भेजने की कोशिश भी की जा रही है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सप्लाई इलाके की पूरी जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
फिलहाल हाईवे नाकेबंदी और सीमित सप्लाई के कारण कांगपोकपी के लोगों को रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए सामान्य से कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. चीनी का 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंचना इस आपूर्ति संकट की गंभीरता को दिखाता है.