विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ईवीएम ही नहीं, बल्कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी जनता का समर्थन हासिल करने में नाकाम साबित हुई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि केवल आरोप लगाने से जनसमर्थन नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए जमीन पर मेहनत करनी पड़ती है.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया को लेकर राहुल गांधी लगातार सवाल उठाते रहे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव बैलेट से करा दिए जाएं, तब भी कांग्रेस की स्थिति नहीं बदलने वाली. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का प्रदर्शन यह दिखाता है कि पार्टी जनता के बीच अपना प्रभाव बनाए रखने में असफल हो रही है.
बीजेपी सांसद ने कहा कि जिन चुनावों में बैलेट से मतदान हुआ, उनमें भी कांग्रेस अपने वजूद का एहसास कराने में नाकाम रही. उनके मुताबिक इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस के पास जनता का समर्थन हासिल करने की क्षमता नहीं है, चाहे चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से.
उन्होंने कहा, "मेहनत करने से जन समर्थन मिलता है, सैर सपाटा करने से नहीं." सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता और विधायक दोनों ही पार्टी के साथ नहीं हैं.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस को मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग करने के बजाय अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के पास जनसमर्थन नहीं है तो चुनाव का तरीका बदलने से नतीजे नहीं बदलेंगे.
उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि न जनता कांग्रेस के साथ है और न विधायक उसके साथ हैं. उनके मुताबिक पार्टी जिस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है, उसमें वह लगातार नाकाम साबित हो रही है.
बीजेपी नेता ने अपने बयान में बीजेपी नेताओं के चुनावी दौरे का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नितिन नवीन उत्तर प्रदेश जा रहे हैं और अमित शाह पंजाब जा रहे हैं, जबकि राहुल गांधी के वियतनाम जाने की बात कही. उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले नेताओं को ही जनता का समर्थन मिलता है.
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को "काम चोरी की आदत" छोड़ देनी चाहिए, इसके बाद "वोट चोरी" का नारा भी खुद खत्म हो जाएगा.
बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुए 28 विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस ने 12 सीटों पर चुनाव लड़ा. उत्तर प्रदेश की 11 सीटों में कांग्रेस ने चुनाव नहीं लड़ा. कर्नाटक में पार्टी ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन सभी सीटों पर उसे हार मिली. खास बात यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में है.
महाराष्ट्र में कांग्रेस ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा और तीनों पर हार का सामना करना पड़ा. वहीं बिहार में पार्टी ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन यहां भी उसे सभी सीटों पर हार मिली. इन नतीजों के बाद बीजेपी ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति और जनाधार पर सवाल खड़े किए हैं.