'लद्दाख में इसे आपकी विजय माना जाता है', जेपी नड्डा के हाथों अनशन तोड़ने पर घिरे सोनम वांगचुक ने दी प्रतिक्रिया
सोनम वांगचुक को आज मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. अस्पताल से रिलीज होते ही वांगचुक अपनी पत्नी के साथ राजघाट पहुंचे.
पिछले कुछ दिनों से मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया. अस्पताल से छुट्टी मिलते ही सोनम वांगचुक अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी.
इस मौके पर जब वांगचुक से पूछा गया कि आपने सरकार के प्रतिनिधि के हाथ से (जेपी नड्डा) के हाथ से सूप पीकर अनशन क्यों तोड़ा? इस पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार या किसी बड़े नेता के हाथ से अनशन तोड़ना हमारे लद्दाख में आपकी विजय का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने कहा कि हमारे लद्दाख में भी कई आंदोलन हुए हैं वहां पर सरकार के प्रतिनिधि खासकर बड़े नेता के हाथ से अनशन तोड़ना आपकी विजय का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने कहा कि जब आंदोलन सफल नहीं होता तो हम छोटी बच्ची या बूड़ी मां के हाथ से अनशन समाप्त करते हैं. वांगचुक ने कहा कि हमने लद्दाख और लेह में अनशन के दौरान ऐसा ही किया था, तो मेरे ख्याल से यह एक सांस्कृतिक अंतर है.
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बापू को दी श्रद्धांजलि
महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद वांगचुक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं देश को बताना चाहता हूं कि बापू को दिखाया रास्ता आज भी उतना ही सही और प्रासंगिक है जितना 100 साल पहले था. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के कारण ही हमारी जीत हुई है. हिंसा होती तो मामला बिगड़ सकता था इसलि मैंने समय से पहले अनशन खत्म किया. बता दें कि वांगचुक नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन पर बैठे थे.
तबीयत पहले से काफी बेहतर
वांगचुक ने आगे कहा कि अब मेरी तबीयत पहले से काफी बेहतर है. मैं धीरे-धीरे खाना खा रहा हूं और शरीर में ताकत लौट रही है. अब में कुछ ही दिनों बाद अपने घर लद्दाख वापस लौट जाऊंगा.