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NSA में गिरफ्तार सोनम वांगचुक जेल में पढ़ रहे ‘टेल्स ऑफ प्रिजन लाइफ’, बच्चों को दे रहे शिक्षा

लेह में सितंबर 24 के विरोध के बाद एनएसए में गिरफ्तार सोनम वांगचुक जेल में बच्चों को पढ़ा रहे हैं और श्री अरविंदो की किताब 'Tales of Prison Life' पढ़कर मानसिक संतुलन बनाए रख रहे हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
NSA में गिरफ्तार सोनम वांगचुक जेल में पढ़ रहे ‘टेल्स ऑफ प्रिजन लाइफ’, बच्चों को दे रहे शिक्षा
Courtesy: social media

नई दिल्ली: लेह में 24 सितंबर की हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार लद्दाख आधारित जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जेल में बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं और उनके माता-पिता को पालन-पोषण की सलाह दे रहे हैं. 

वांगचुक श्री अरविंदो की आत्मकथात्मक पुस्तक ‘Tales of Prison Life’ पढ़कर अपने समय का सदुपयोग कर रहे हैं. उनकी पत्नी और हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स की सह-संस्थापक गीतांजलि जे अंगमो ने उनकी दिनचर्या और उद्देश्यपूर्ण जीवन के बारे में जानकारी साझा की है.

जेल में बच्चों के साथ समय बिताना

सोनम वांगचुक जेल में जेल कर्मियों के बच्चों के साथ समय बिता रहे हैं. बच्चों को पढ़ाई कराते हैं और उनके माता-पिता को सलाह देते हैं कि बच्चों की गलतियों पर अधिक ध्यान देने के बजाय उनके अच्छे कार्यों की सराहना करें. गीतांजलि जे अंगमो ने बताया कि यह व्यवहार वांगचुक को श्री अरविंदो की जेल की किताबों से प्रेरित कर रहा है. इस तरह वांगचुक जेल में भी सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण गतिविधियों में लगे हैं.

श्री अरविंदो की किताब का प्रभाव

वांगचुक श्री अरविंदो की ‘Tales of Prison Life’ पढ़कर प्रेरित हैं, जिसमें अरविंदो ने 1908-09 में अलिपोर जेल में बिताए एक साल का अनुभव साझा किया है. वह कहते हैं कि उनके मामले और अरविंदो के अनुभवों में समानताएं हैं, जहां सबसे देशभक्त अरविंदो पर भी देशद्रोह का आरोप लगाया गया था. वांगचुक ने अगली बार जेल में एक सन्डियल और चींटियों के व्यवहार की किताब लाने की इच्छा जताई है.

लद्दाख की मांगें और सरकारी प्रस्ताव

लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने गृह मंत्रालय को 29 पेज का प्रस्तावित मांग पत्र सौंपा है. इसमें लद्दाख को राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकार और 24 सितंबर की हिंसा में गिरफ्तार लोगों के लिए आम माफी की मांग शामिल है. LAB के सह-अध्यक्ष चेरिंग डोरजाई लाकरूक ने बताया कि इसमें वांगचुक और उनके साथ गिरफ्तार अन्य लोगों के लिए सामान्य क्षमा की भी मांग की गई है.

24 सितंबर की हिंसा और नतीजे

24 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन में चार लोग मारे गए और लगभग 100 अन्य घायल हुए, जिनमें पुलिस और अर्धसैनिक बल शामिल हैं. प्रदर्शनकारियों ने हिंसक गतिविधियों में कई भवनों को नुकसान पहुंचाया और भाजपा कार्यालय व पुलिस वाहन में आग लगाई. इस हिंसा के बाद वांगचुक पर कई आरोप लगाए गए, जिनमें 'चाइनीज एजेंट', 'विदेश से समर्थित', 'हिंसा भड़काने वाला' और 'भारतीय संप्रभुता के लिए खतरा' शामिल हैं.

जेल में उद्देश्यपूर्ण जीवन और मानसिक संतुलन

वांगचुक जेल में भी बच्चों के साथ समय बिताकर और श्री अरविंदो की पुस्तक पढ़कर मानसिक संतुलन बनाए रखे हैं. जेल में अपनी दिनचर्या और सीखने के तरीके को उन्होंने गीतांजलि के माध्यम से साझा किया. यह दिखाता है कि वांगचुक कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और सकारात्मक मार्गदर्शन के माध्यम से समाज के लिए योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं.