सोनम वांगचुक की इन तीन मांगों को पूरा करने के लिए सरकार तैयार, वीडियो जारी कर दी जानकारी
सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल आज खत्म कर दी. उन्होंने इसके बारे में जानकारी एक वीडियो शेयर कर के दिया है. जिसमें उन्होंने बताया कि सरकार ने उनके कौन से तीन डिमांड्स को पूरा किया है.
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल शुक्रवार को समाप्त कर दी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने यह निर्णय लिया.
मिली जानकारी के मुताबिक देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे. इस दौरान लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. सरकार और वांगचुक के बीच पिछले दो दिनों से लगातार बातचीत चल रही थी.
दो दिन तक चला लिखित आश्वासन पर गतिरोध
सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार मौखिक भरोसा देने को तैयार थी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे. इसी कारण बातचीत में दो दिन का अतिरिक्त समय लगा और उन्हें दो दिन और भूख हड़ताल जारी रखनी पड़ी. उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ती तो वह आगे भी अनशन जारी रखने के लिए तैयार थे. अंतत: सरकार ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन सौंप दिया, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया.
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सरकार ने दिए तीन महत्वपूर्ण आश्वासन
सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन मे तीन प्वाइंट्स शामिल हैं. जिसमें पहला, जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ किसी प्रकार का मामला दर्ज नहीं किया जाएगा. दूसरा, संसद में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार पर चर्चा कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. तीसरा, हाल में नीट पेपर लीक से जुड़ी घटनाओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के विषय में सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी.
अनशन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसद सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे थे. इन सांसदों ने हस्ताक्षर कर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की और भरोसा दिलाया कि संसद में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा कराई जाएगी. सरकार के लिखित आश्वासन के बाद अब इस पूरे घटनाक्रम पर आगे होने वाली संसदीय चर्चा और फैसलों पर सभी की नजर रहेगी.