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India Daily

इन 22 राज्यों में अप्रैल से शुरू होगी SIR प्रक्रिया, चुनाव आयोग ने जारी किए दिशा निर्देश

चुनाव आयोग ने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल जून में पूरे देश में मतदाता सूची का पैन-इंडिया SIR करने का फैसला लिया गया था. बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है.

Anuj
Edited By: Anuj
इन 22 राज्यों में अप्रैल से शुरू होगी SIR प्रक्रिया, चुनाव आयोग ने जारी किए दिशा निर्देश
Courtesy: Chat GPT

नई दिल्ली: देश में मतदाता सूची को और ज्यादा सही और अपडेट बनाने के लिए चुनाव आयोग ने एक अहम कदम उठाया है. आयोग ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की तैयारी जल्द से जल्द पूरी करें.

यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट में बड़े स्तर पर सुधार और संशोधन के लिए की जाती है, ताकि चुनाव के समय कोई गड़बड़ी या विवाद न हो. आयोग ने अपने आधिकारिक पत्र में कहा कि SIR का अगला चरण अप्रैल से शुरू होने की संभावना है.

चुनाव आयोग ने जारी किए निर्देश

इसलिए सभी संबंधित राज्यों के प्रशासन और चुनाव अधिकारियों को समय रहते जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है. जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश भेजा गया है, उनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं. इसके अलावा चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली व दमन-दीव, दिल्ली और लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेश भी इसमें शामिल हैं.

असम में SIR की जगह स्पेशल रिवीजन

चुनाव आयोग ने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल जून में पूरे देश में मतदाता सूची का पैन-इंडिया SIR करने का फैसला लिया गया था. बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, जबकि नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में अभी भी यह काम चल रहा है. असम में SIR की जगह 'स्पेशल रिवीजन' किया गया था, जो 10 फरवरी को पूरा हो गया.

SIR का मुख्य उद्देश्य क्या है?

SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह सही, साफ और अपडेटेड बनाना होता है. इस प्रक्रिया के दौरान नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं. वहीं, जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो किसी अन्य स्थान पर स्थायी रूप से चले गए हैं, उनके नाम सूची से हटाए जाते हैं. इसके अलावा मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य जानकारी से जुड़ी गलतियों को भी ठीक किया जाता है. इससे चुनाव के समय सही मतदाता ही वोट डाल सके, यह सुनिश्चित होता है.

'चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं'

चुनाव आयोग चाहता है कि यह पूरा काम तय समय सीमा के भीतर और व्यवस्थित तरीके से पूरा हो. आयोग का मानना है कि सटीक और अपडेटेड मतदाता सूची निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की सबसे अहम आधार होती है. यदि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी रहती है तो चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं.

SIR को लेकर राजनीतिक विवाद

गौरतलब है कि बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले किए गए SIR को लेकर काफी राजनीतिक विवाद हुआ था. विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए थे और आरोप लगाए थे कि इससे कुछ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए.

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था और कहा था कि प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही की गई. चुनाव आयोग का यह कदम आने वाले चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारू तरीके से कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाता प्रणाली को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी.