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शिवराज चौहान की सुरक्षा बढ़ी, पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी से मिली थी धमकी

खुफिया जानकारी के बावजूद, शिवराज सिंह चौहान की मध्य प्रदेश में सुरक्षा 12 दिसंबर को ही बढ़ाई गई, जब भोपाल में उनके आधिकारिक आवास बी-8 और बी-9 के बाहर बैरिकेड लगाए गए और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए.

Photo-@OfficeofSSC
Gyanendra Sharma

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. केंद्र द्वारा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संभावित खतरे की आशंका जताने और एक गंभीर चूक को उजागर करने के लगभग एक महीने बाद शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा बढ़ा दी है.

गृह मंत्रालय के आईएस-1 डिवीजन (वीआईपी सुरक्षा इकाई) द्वारा 12 नवंबर को लिखे गए एक पत्र के अनुसार, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने सूचित किया था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई चौहान से संबंधित जानकारी में "रुचि दिखा रही है". पत्र में राज्य सरकार और दिल्ली पुलिस से किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का आग्रह किया गया था.

खुफिया जानकारी के बावजूद, शिवराज सिंह चौहान की मध्य प्रदेश में सुरक्षा 12 दिसंबर को ही बढ़ाई गई, जब भोपाल में उनके आधिकारिक आवास बी-8 और बी-9 के बाहर बैरिकेड लगाए गए और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए.

खतरे की आशंका

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किसी खतरे की आशंका को औपचारिक रूप से चिह्नित किया जाता है, तो एक दिन की देरी भी जोखिम भरी हो सकती है, ऐसे में पूरे एक महीने की देरी बेहद चिंताजनक होती है.

शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के सबसे प्रमुख राजनीतिक नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने चार बार - 2005, 2008, 2013 और 2020 में - मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और वर्तमान में केंद्र सरकार में एक महत्वपूर्ण मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं. 

पहले से ही जेड+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त

सुरक्षा तैनाती में देरी के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए चौहान ने कहा , "मेरा ध्यान खुद पर नहीं है. मेरा एकमात्र कर्तव्य जनता की सेवा करना है. जो मेरी जिम्मेदारी नहीं है, उसके बारे में मुझे क्यों चिंता करनी चाहिए?" चौहान को पहले से ही जेड+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, जिसमें 10 से अधिक एनएसजी कमांडो, लगभग 55 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी और युद्ध एवं मार्शल आर्ट में प्रशिक्षित विशेष सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं.

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार उन्हें अलग से सुरक्षा प्रदान करती है क्योंकि वे पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं, और मध्य प्रदेश से बाहर यात्रा करने पर मेजबान राज्य भी सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा कई एजेंसियों की साझा जिम्मेदारी बन जाती है.