क्या था शेख हसीना का ‘ईसाई स्टेट’ वाला दावा? NIA की कार्रवाई के बाद फिर हो रही चर्चा
मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी के बाद शेख हसीना का ‘ईसाई राज्य’ वाला पुराना बयान फिर चर्चा में है. विशेषज्ञ इन घटनाओं को जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि अब तक कोई ठोस आधिकारिक संबंध सामने नहीं आया है.
पूर्वोत्तर भारत में हाल ही में हुई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों और विश्लेषकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्रीय साजिशों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. इसी बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का दो साल पुराना बयान फिर सुर्खियों में आ गया है, जिसमें उन्होंने एक कथित 'ईसाई राज्य' बनाए जाने की योजना का जिक्र किया था.
क्यों चर्चा में है शेख हसीना का बयान?
साल 2024 में सत्ता से हटने से कुछ समय पहले शेख हसीना ने दावा किया था कि एक विदेशी शक्ति बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को मिलाकर 'ईसाई राज्य' बनाने की योजना पर काम कर रही है. उस वक्त इस बयान को गंभीरता से नहीं लिया गया था. लेकिन अब हालिया गिरफ्तारियों के बाद इसे नए नजरिए से देखा जा रहा है और इस पर चर्चा तेज हो गई है.
एनआईए की कार्रवाई और गिरफ्तारी
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि ये लोग पर्यटक वीजा पर भारत आए और फिर मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार पहुंच गए. एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने वहां सक्रिय सशस्त्र समूहों को ड्रोन और सैन्य प्रशिक्षण मुहैया कराया.
पूर्वोत्तर में संदिग्ध गतिविधियों का दायरा
जांच एजेंसियों के मुताबिक इन विदेशी नागरिकों की गतिविधियां केवल म्यांमार तक सीमित नहीं हो सकतीं. आशंका जताई जा रही है कि इनके तार भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी समूहों से भी जुड़े हो सकते हैं. मिजोरम में प्रवेश के लिए जरूरी परमिट नियमों का उल्लंघन भी सामने आया है. इस मामले ने सीमा सुरक्षा और विदेशी गतिविधियों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है.
विशेषज्ञों की राय और बड़ी तस्वीर
कुछ विशेषज्ञ इन घटनाओं को एक बड़े भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे अभी अटकलें ही बता रहे हैं. उनका कहना है कि ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए और साक्ष्य जरूरी हैं. म्यांमार में जारी संघर्ष और भारत-म्यांमार सीमा की जटिल स्थिति इस मामले को और संवेदनशील बनाती है. फिलहाल, एनआईए की जांच से ही आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी.
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