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'पानी के बदले आतंक? ये सौदा मंजूर नही', एस जयशंकर ने सिंधु समझौते पर पाकिस्तान को दिया सीधा जवाब

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को एक बार फिर से सबक सिखाया है. सिंधु समझौते मामले पर उन्होंने पाक को करारा जवाब देते हुए साफ कह दिया कि मदद और आतंकवाद एक साथ नहीं हो सकता.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर से पाकिस्तान को धोया है. उन्होंने पड़ोसी मुल्क का नाम लिए बिना उनपर जमकर बोला. साथ ही दुनिया को एक बार फिर से संदेश दिया है कि भारत के पास अपने रक्षा का पूरा अधिकार है और अपनी रक्षा के लिए देश सबकुछ करेगा. 

जयशंकर ने कहा कि हम उनको पानी नहीं दे सकते है जो आतंकवाद फैलाते है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने चेनाब नदी पर या प्रोजेक्ट बनाने का फैसला किया है. उन्होंने बताया है कि पर्यावरण मंत्रालय ने इसके लिए एक कमेटी बनाने की अनुमति दे दी है.

पाक नीति पर क्या बोले विदेश मंत्री?

एस. जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उनपर तीखा हमला बोला है. उन्होंने पाकिस्तान को एक बुरा पड़ोसी बताया है. ऐसा पड़ोसी जो गलत चीजों को बढ़ावा दे रहा है. उन्होंने यह साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत को कैसी प्रतिक्रिया देनी है इसका फैसला नई दिल्ली में ही किया जाएगा. इस मुद्दे पर कोई भी नसीहत को स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही है. विदेश मंत्री ने यह सारी बातें आज यानी 2 जनवरी को मद्रास में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा है.

उन्होंने कहा कि हमारा एक पड़ोसी जिसकी नीति ही आतंकवाद है. उन्होंने कहा कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं और अपनी गलती को नहीं मानते हैं, ऐसे में भारत के पास जवाब देने का पूरा अधिकार है. अपनी देश की रक्षा के लिए भारत वह सब कर सकता है जो करना जरूरी है. हालांकि विदेश मंत्री अभी कुछ दिनों पहले बांग्लादेश यात्रा पर थे, जहां उनकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी से हुई थी. 

बांग्लादेश यात्रा के दौरान मचा था बवाल 

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनूस ने एस जयशंकर और पाकिस्तानी अधिकार की फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी. जिसमें दोनों हाथ मिलाते नजर आ रहे थे. जिसके बाद इस फोटो के बारे में भारत सरकार के कार्यालय द्वारा जानकारी भी साझा की गई थी. जिसमें बताया गया था कि यह केवल एक औपचारिक मीटिंग थी, क्योंकि जयशंकर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे, ऐसे में यह एक औपचारिक मुलाकात था जिसे नकारा नहीं जा सकता है.