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'हमारा समय बर्बाद मत करो...' जंतर मंतर प्रदर्शन पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्यवाही के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से समय बर्बाद न करने की बात कही.

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Meenu Singh

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान वकील ने पुलिस कार्यवाही से जुड़े वीडियो का जिक्र किया, लेकिन CJI ने कहा कि अदालत के पास वीडियो देखने का समय नहीं है. मामले को लेकर अब आगे की सुनवाई प्रक्रिया के अनुसार होगी. इस उनके इस बयान को लेकर विवाद चल रहा है. 

वीडियो दिखाने की मांग पर CJI ने दी प्रतिक्रिया

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस कार्यवाही से जुड़े वीडियो का हवाला देते हुए अपनी बात रखी. इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि, 'हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है.' उन्होंने याचिकाकर्ता से अदालत का समय बर्बाद नहीं करने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से किया इनकार

याचिका में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्यवाही को चुनौती दी गई थी. वकील ने बताया कि छात्र NEET परीक्षा के सही संचालन और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में सुधार जैसे मुद्दे उठा रहे हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया. दायर याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा, 'हमारा समय बर्बाद न करें.'


दिल्ली हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला

इस मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई से इनकार किया था. अदालत ने कहा था कि हर मामले में न्यायालय को शामिल करने की जरूरत नहीं है. हालांकि, बुधवार को जनहित याचिका पर सुनवाई होने की जानकारी सामने आई है, जिसमें पुलिस कार्यवाही की स्वतंत्र जांच और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा की मांग की गई है.

प्रदर्शन और पुलिस निगरानी को लेकर विवाद

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इनमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्यवाही, निगरानी के आरोप और अन्य मुद्दे शामिल हैं. केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि प्रदर्शन स्थल पर वीडियोग्राफी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी, न कि प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए.