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यूक्रेन युद्ध में मारे गए रूसी सैनिक का गया में हुआ पिंडदान, हजारों किलोमीटर यात्रा कर बिहार आया परिवार

सैनिक के परिवार ने कहा कि गया में पूर्वजों की पूजा-अर्चना का महत्व विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसलिए उन्होंने दृढ़ विश्वास जताया कि यहां पर पिंडदान करने से दिवंगत आत्मा को शांति मिलेगी.

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Sagar Bhardwaj

रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए एक रूसी सैनिक की आत्मा की शांति के लिए उसके परिवार ने हजारों किलोमीटर दूर बिहार के गया में आकर उसका पिंडदान किया. ललिता राधा रानी फेस, उनके पति सुंदरा फेस और परिवार के अन्य लोगों ने ललिता के भाई की यादों का सम्मान करने के लिए फाल्गु नदी के किनारे सभी पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ पिंडदान प्रथा को संपन्न किया.

सुंदरा ने कहा कि युद्ध में उनके बहनोई की मौत के बाद उनका परिवार सदमे में था. उन्होंने कहा कि गया में पूर्वजों की पूजा-अर्चना का महत्व विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसलिए उन्होंने दृढ़ विश्वास जताया कि यहां पर पिंडदान करने से दिवंगत आत्मा को शांति मिलेगी. उन्होंने कहा, 'हम अपने बहनोई और पिता की आत्मा की शांति के लिए यहां आए. हमारी यह हार्दिक कामना है कि हमारे परिवार में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहे.' परिजनों ने बताया कि रूस में गया के धार्मिक महत्व के बारे में सभी लोगों को पता है और यही कारण है कि उन्होंने इस स्थान पर पहुंचने के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा की.

स्थानीय पुजारी ने करवाया पिंडदान

रूस से आए इस परिवार का गया के एक स्थानीय पुजारी कुमार गौरव ने पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान करवाया. उन्होंने बताया कि पूरे परिवार ने विशेष रूप से गया आने के लिए इतने किलोमीटर की यात्रा की. बता दें कि हर साल दुनिया भर से  हजारों संख्या में लोग पिंडदान के लिए गया आते हैं और फाल्गु नदी के तट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करवाते हैं.