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औरगंजेब विवाद में हुई दारा शिकोह की एंट्री, RSS नेता ने क्यों बताया 'मुगल हीरो'?

दारा शिकोह मुगल सम्राट शाहजहां के सबसे बड़े पुत्र थे और उन्हें भारत में अंतर-धार्मिक समझ का अग्रदूत कहा जाता है. उन्हें एक "उदारवादी मुसलमान" के रूप में पेश किया गया है, जो हिंदू और इस्लामी परंपराओं के बीच समान आधार तलाशने का प्रयास करता था.

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Mayank Tiwari

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने रविवार (23 मार्च) को “गंगा-जमुनी संस्कृति के पैरोकारों” की आलोचना की, जो संस्कृतियों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने कहा कि समर्थकों ने मुगल शासक औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को कभी नायक नहीं माना. होसबोले ने उन ऐतिहासिक हस्तियों को प्रतीक बनाने पर सवाल उठाया जो “भारत के लोकाचार के खिलाफ” हैं.

न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, दत्तात्रेय होसबोले ने कहा,' इससे पहले भी कई घटनाएं हुई हैं. जहां दिल्ली में एक 'औरंगजेब रोड' थी, जिसका नाम बदल दिया गया और उसे अब्दुल कलाम रोड कर दिया गया. इसके पीछे कुछ कारण हुए थे. क्यों औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को हीरो नहीं बनाया गया.

दारा शिकोह पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता दत्तात्रेय होसबोले ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान देते हुए गंगा-जमुनी संस्कृति के समर्थकों पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "गंगा-जमुनी संस्कृति की बात करने वालों ने कभी दारा शिकोह को आगे लाने के बारे में नहीं सोचा. क्या हम किसी ऐसे शख्स को प्रतीक बनाने जा रहे हैं जो भारत की लोकाचार के खिलाफ था और जिन्होंने इस भूमि की परंपराओं के अनुसार काम किया?"

जानिए दारा शिकोह कौन था?

दारा शिकोह मुगल सम्राट शाहजहां के सबसे बड़े पुत्र थे और उन्हें भारत में अंतर-धार्मिक समझ का अग्रदूत कहा जाता है. उन्हें एक "उदारवादी मुसलमान" के रूप में पेश किया गया है, जो हिंदू और इस्लामी परंपराओं के बीच समान आधार तलाशने का प्रयास करता था.

शिकोह को 1655 में युवराज घोषित किया गया लेकिन 1657 में औरंगजेब ने उसे पराजित कर दिया. आखिर में 1659 में 44 साल की आयु में औरंगजेब ने उसकी हत्या कर दी. मजमा-उल-बहरीन और सिर्र-ए-अकबर जैसी उनकी कृतियों का उद्देश्य हिंदू धर्म और इस्लाम के बीच संबंध स्थापित करना था. उन्होंने उपनिषदों और अन्य हिंदू ग्रंथों का संस्कृत से फ़ारसी में अनुवाद किया, जिससे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का परिचय यूरोप और पश्चिम में हुआ. अपने भाई औरंगज़ेब के विपरीत, दारा शिकोह का झुकाव सैन्य गतिविधियों के बजाय दर्शन और रहस्यवाद की ओर था.

स्वतंत्रता संग्राम और आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़ाई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता दत्तात्रेय होसबोले ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ और उनसे पहले आए आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़ी.  उन्होंने कहा, "अंग्रेजों से पहले जो लोग थे, उनके खिलाफ भी लड़ी गई लड़ाई को आजादी की लड़ाई माना जाना चाहिए. महाराणा प्रताप ने जो किया वह भी आजादी की लड़ाई थी.

आक्रमणकारी मानसिकता और देश के लिए खतरा

होसबोले ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई आक्रमणकारी मानसिकता वाला है, तो वह देश के लिए खतरा हो सकता है. उनका यह बयान उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जो आरएसएस के तहत देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर अपनाया गया है. 

आरएसएस का दृष्टिकोण

आरएसएस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा धर्म का नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अस्मिता का है. उनका मानना है कि हमें अपनी परंपराओं और इतिहास को समझते हुए उन लोगों को महत्व देना चाहिए जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और अखंडता के लिए संघर्ष किया.

महाराणा प्रताप का योगदान

महाराणा प्रताप का उदाहरण देते हुए, होसबोले ने यह भी कहा कि उन जैसे महान नायकों ने अपनी धरती के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी, जो कि अंग्रेजों के आने से पहले के समय की बात है. महाराणा प्रताप ने अपनी वीरता और संघर्ष से देशवासियों को प्रेरित किया, और उनका योगदान आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है.