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‘भारत लंबी लड़ाई के लिए तैयार था…’ ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ का बड़ा खुलासा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक व्यवस्था में भारत की मजबूत सुराक्षा नीतिक पर बात की. इस दौरान उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान पर भी जमकर हमला बोला.

ANI
Shanu Sharma

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे. इस दिन का अब एक साल पूरा होने वाला है. उससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर कई बातें की है. उन्होंने इस ऑपरेशन को बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की मजबूत नीति का प्रतीक बताया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन मात्र 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, हालांकि इसके पीछे लंबी और सावधानीपूर्वक तैयारी थी. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ती तो हम लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार थे.

आतंकवाद के तीन प्रमुख आयाम

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन में भारत ने केवल उन ठिकानों को लक्ष्य बनाया जो पहलगाम हमले के जिम्मेदार थे. उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि मानवीय मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है. अक्सर इसे धर्म या विचारधारा के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, जो आतंकियों को संरक्षण प्रदान करती है.

उन्होंने आतंकवाद के तीन प्रमुख आयाम ऑपरेशनल, आइडियोलॉजिकल और पॉलिटिकल बताए. उन्होंने इसे रावण की नाभि की उपमा देते हुए कहा कि आतंकवाद की असली ताकत उसकी वैचारिक और राजनीतिक जड़ों में छिपी है. जब तक इन जड़ों को नहीं सुखाया जाएगा, आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होगा. 

पाकिस्तान के खिलाफ बोला हमला

रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान पर साफ तौर पर आरोप लगाया कि वह आतंकवाद को लगातार समर्थन देता रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि दोनों देश आजादी के समय एक साथ स्वतंत्र हुए थे, लेकिन आज भारत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विश्व पटल पर चमक रहा है, जबकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बन गया है. उन्होंने जोर दिया कि भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों में कोई फर्क नहीं करता.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परमाणु धमकियां मिलने के बावजूद भारत ने राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी और अपने लक्ष्य को हासिल किया. रक्षा मंत्री ने बदलती विश्व व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला. आज कई बड़े देश अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं. पुराना नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सिस्टम सवालों के घेरे में है, जबकि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं. ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा और विकास रणनीति को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना होगा.