रेलवे स्टेशनों के नलों के पानी में मिला मल में पाया जाने वाला ई-कोलाई बैक्टीरिया, CAG रिपोर्ट में खुलासा
CAG की ऑडिट रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों की यात्री सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं. कई जगह पेयजल के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया और जरूरी सुविधाओं की कमी मिली.
देशभर के रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट सामने आई है. ऑडिट में रेलवे के विभिन्न जोन के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों का अध्ययन किया गया. रिपोर्ट में कई स्टेशनों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर खामियां दर्ज की गई हैं.
पानी के नमूनों में बैक्टीरिया मिला
रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में आठ जोन के 49 और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों से प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी के नमूने लिए गए. जांच में कुछ नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए. कई स्टेशनों के वाटर कूलर में भी ई-कोलाई मिलने की बात सामने आई है. ई-कोलाई आमतौर पर मल संदूषण से जुड़ा बैक्टीरिया माना जाता है.
कई बड़े स्टेशन भी जांच के दायरे में
ऑडिट के दौरान दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर-पलक्कड़, दक्षिण-मध्य रेलवे के हैदराबाद और मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला जैसे स्टेशनों का अध्ययन किया गया. पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन को भी जांच में शामिल किया गया था.
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90 फीसदी स्टेशनों में सुविधाओं की कमी
CAG के अनुसार, जांच किए गए 512 स्टेशनों में से 458 यानी करीब 90 प्रतिशत स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के प्रावधान में कमियां पाई गईं. मुंबई सेंट्रल, CSMT, हावड़ा-सियालदह और नई दिल्ली जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भी बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले जैसी सुविधाओं में कमी दर्ज की गई.
रेलवे बोर्ड के पुराने निर्देशों पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में NSG-1 से NSG-6 श्रेणी के स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. CAG ने अब जल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित जांच और पेयजल की गुणवत्ता के व्यापक परीक्षण के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने की सिफारिश की है.