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वोटर रजिस्ट्रेशन में बड़ा बदलाव: नए वोटर्स के लिए अब माता-पिता की 'SIR' डिटेल देना हुआ अनिवार्य

 चुनाव आयोग ने ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण के लिए एक नया नियम अनिवार्य कर दिया है, जिसके तहत अब नए आवेदकों को फॉर्म 6 में अपने माता-पिता के 'एसआईआर' (SIR) विवरण की घोषणा करनी होगी.

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Sagar Bhardwaj

देश में नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने वाले नए नागरिकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी के 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision - SIR) अभ्यास से जुड़े विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है. चुनाव आयोग ने ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर इस नए नियम को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है.

 फॉर्म 6 में जोड़ा गया नया घोषणा पत्र

यह नया नियम पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और नए आवेदकों के लिए वैधानिक 'फॉर्म 6' (Form 6) में शामिल किया गया है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हालांकि इस संबंध में कोई औपचारिक राजपत्र अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से इसे ऑनलाइन सबमिशन के लिए अनिवार्य बना दिया गया है. अब आवेदक इस नई घोषणा को भरे बिना ऑनलाइन फॉर्म 6 को आगे सबमिट नहीं कर पाएंगे, जो पोर्टल के पार्ट J और K के बीच जोड़ा गया है.

आवेदकों को मिलेंगे ये तीन विकल्प

ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान आवेदकों के सामने स्क्रीन पर तीन विकल्प दिखाई देंगे. पहले विकल्प में पूछा जाएगा कि क्या आवेदक का नाम पिछली एसआईआर सूची में था; दूसरे विकल्प में माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली सूची में होने की जानकारी मांगी जाएगी; और तीसरा विकल्प उन लोगों के लिए होगा जिनका या जिनके परिवार का नाम पिछली एसआईआर सूची में नहीं था. पहले दो विकल्पों को चुनने पर आवेदकों को अपने विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग बूथ नंबर और पुरानी क्रम संख्या की विस्तृत जानकारी देनी होगी.

बिहार से शुरू हुआ यह नया प्रयोग

आयोग के अधिकारियों ने बताया कि इस घोषणा प्रणाली को सबसे पहले पिछले साल जून में बिहार में शुरू किए गए एसआईआर अभ्यास के दौरान आजमाया गया था. सफलता मिलने के बाद अब इसे उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है जहां एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसका मुख्य उद्देश्य मतदाताओं की सही मैपिंग करना और नए मतदाताओं द्वारा जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की संख्या को कम करना है, जिससे फर्जी वोटिंग पर भी लगाम कसी जा सकेगी.