'प्रियंका कहीं से उपचुनाव लड़कर सदन पहुंच जाएंगी...', आखिर क्या कहना चाहती है कांग्रेस?
Priyanka Gandhi: कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर से प्रियंका गांधी को चुनाव में नहीं उतारा है और उन्हें सिर्फ प्रचार तक ही सीमित रखा गया है.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का चुनावी डेब्यू एक बार फिर होते-होते रह गया है. कांग्रेस के ही कई नेता लगातार मांग कर रहे थे कि प्रियंका गांधी को अमेठी या रायबरेली से चुनाव लड़वाया जाए. हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने रायबरेली से राहुल गांधी और अमेठी से के एल शर्मा को चुनाव में उतारा है. प्रियंका गांधी लगातार चुनाव प्रचार में सक्रिय भी हैं लेकिन अभी भी वह कोई चुनाव नहीं लड़ रही है. इस बीच कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अपने एक ट्वीट में जो इशारा किया है, शायद वही कांग्रेस की भविष्य की रणनीति को दर्शाता है. सुप्रिया श्रीनेत ने विपक्षियों को जवाब देते हुए कहा है कि प्रियंका गांधी तो कहीं से भी उपचुनाव लड़कर सदन पहुंच जाएंगी.
अगर इसके पीछे छिपे संदेश को समझा जाए तो पता चलता है कि कांग्रेस अभी से एक बैकअप प्लान लेकर चल रही है. शायद इसी प्लान के तहत राहुल गांधी को एक बार फिर से दो सीटों से चुनाव लड़ाया गया है. 2019 में अमेठी और वायनाड से चुनाव लड़े राहुल गांधी अमेठी से हार गए थे. इस बार वह वायनाड के साथ-साथ रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार राहुल गांधी दोनों सीटों से चुनाव जीत सकते हैं.
उपचुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी?
अगर राहुल गांधी वायनाड और रायबरेली से चुनाव जीत जाते हैं तो उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी. सुप्रिया श्रीनेत के इस लंबे ट्वीट में छिपे मैसेज को समझें तो पता चलता है कि कांग्रेस अब प्रियंका गांधी को इन्हीं दोनों में से किसी एक सीट से उपचुनाव में उतारने की तैयारी कर रही है. हालांकि, खुद प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ने या न लड़ने को लेकर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है. ऐसा संभव है कि वायनाड और रायबरेली दोनों से जीतने की स्थिति में राहुल गांधी अपने परिवार की सीट रायबरेली लौट जाएं और वायनाड को प्रियंका गांधी के हवाले कर दें.
स्मृति ईरानी ने क्या कहा?
अमेठी से के एल शर्मा को चुनाव में उतारे जाने पर स्मृति ईरानी ने कहा है, 'मेहमानों का स्वागत है, हम लोग अतिथियों के स्वागत में कोई कसर छोड़ेंगे नहीं. इतना ही कह दूं कि अमेठी से गांधी परिवार के किसी सदस्य का न लड़ना यह बताता है कि एक भी वोट पड़ने से पहले ही गांधी परिवार और कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है क्योंकि उन्हें लगता कि जीत की थोड़ी भी गुंजाइश है तो वे खुद लड़ते, किसी प्रॉक्सी को नहीं लड़ाते.'
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