दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों को मिली बड़ी राहत, सरकार ने फीस नियंत्रण कानून पर 2027 तक लगाई रोक

दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल के लिए शुल्क विनियमन कानून को 2027 तक रोक दिया है. इस निर्णय से कानून की जांच गहराई से करने का मौका मिलेगा.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने इस साल प्राइवेट स्कूलों को बड़ी राहत दी है. फीस मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है. दिल्ली सरकार ने शुल्क विनियमन कानून लागू न करने का फैसला लिया है. सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी. यह कदम तब उठाया गया जब कोर्ट ने शिक्षा निदेशालय (DOI) को दिल्ली स्कूल शिक्षा (Transparency in fee setting and regulation) अधिनियम, 2025 को लागू करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा. 

याचिका दायर

प्राइवेट स्कूल ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से कानून के कार्यान्वयन पर रोक लगाने के लिए अदालत में याचिका दायर की. दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर-जनरल (एजीजी) एसवी राजू ने न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ के समक्ष 1 फरवरी (रविवार) को प्रकाशित एक राजपत्र अधिसूचना प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया है कि स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए 1 अप्रैल, 2025 से पहले से ली जा रही फीस के अतिरिक्त कोई फीस नहीं लेंगे.

आदेश में क्या है?

आदेश में कहा गया है, 'शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले किसी भी अत्यधिक शुल्क को कानून के अनुसार विनियमित और निपटाया जाएगा, बशर्ते कि अधिनियम और नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली कार्यवाही का अंतिम परिणाम दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हो.'

प्राइवेट स्कूलों को मिली राहत 

इस फैसले से प्राइवेट स्कूलों को राहत मिली है, जो सत्र के मध्य में नई व्यवस्था को लागू करने में आने वाली चुनौतियों को लेकर शिकायतें कर रहे थे.

इस बीच, दिल्ली सरकार ने यह बनाए रखा कि कानून स्वयं बरकरार है और अदालतों द्वारा उठाए गए प्रक्रियात्मक अवरोधों को दूर करने के बाद इसे लागू किया जाएगा.

'आगे कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं'

पीठ ने आदेश पर विचार किया और पाया कि उसकी एकमात्र चिंता इस बात को लेकर थी कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष से कानून को कितनी जल्दबाजी में लागू करने की कोशिश की जा रही थी.

पीठ ने स्कूलों की अपीलों को बंद करते हुए कहा 'स्पष्टीकरण को देखते हुए, आगे कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है.' 

हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश 

19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में इस कानून को लागू करना 'अव्यवहारिक' होगा. स्कूलों ने 9 जनवरी को हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील की, जिसमें कानून और 24 दिसंबर को इसके कार्यान्वयन को अनिवार्य करने वाले परिपत्र पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था.

स्कूलों को कानून के तहत 15 जुलाई की समय सीमा के बजाय जनवरी 2026 तक शुल्क विनियमन समितियां गठित करने का आदेश दिया गया था. इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कूल प्रबंधन ने इस निर्णय को पीछे हटने के बजाय एक व्यावहारिक विराम बताया.