कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुवेंदू अधिकारी का शपथ ग्रहण समारोह हो रहा है. इस दौरान एक बेहद भावुक पल देखने को मिला जिसके हर किसी के दिल में घर कर लिया. शपथ समारोह में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंचे तो वह एक बुजुर्ग शख्स के पास गए. पीएम मोदी ने पहले उन्हें गले लगाया. फिर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और काफी देर तक उनसे बातचीत करते रहे. यह देखते ही समारोह में मौजूद लोग भावुक हो गए. कुछ ही मिनटों में यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी. हर तरफ यही सवाल पूछा जाने लगा कि आखिर वो बुजुर्ग शख्स कौन हैं जिनके पैर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर छुए.
बता दें की ये वरिष्ठ बीजेपी कार्यकर्ता माखनलाल सरकार थे. 98 साल के माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में बीजेपी और राष्ट्रवादी विचारधारा के सबसे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं. उन्होंने दशकों तक काम किया और पार्टी को मजबूत बनाने में योगदान दिया.
#WATCH | कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का अभिनंदन किया और उनका आशीर्वाद लिया।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 9, 2026
1952 में, माखनलाल सरकार को कश्मीर में तब गिरफ्तार किया गया था जब वे वहां भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान… pic.twitter.com/rMqWJnHCK3
माखनलाल सरकार का राजनीतिक और सामाजिक सफर बेहद प्रेरणादायक माना जाता है. बता दें की साल 1952 में वह जनसंघ के फाउंडर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर में तिरंगा फहराने के आंदोलन में शामिल हुए थे. उस आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक उस दौर में राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना आसान नहीं था. इसके बावजूद माखनलाल सरकार लगातार संगठन के साथ जुड़े रहे और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को तैयार करते रहे.
साल 1980 में बीजेपी के गठन के बाद पार्टी ने उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों का संगठन समन्वयक बनाया. उस समय पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थी. माखनलाल सरकार ने गांव गांव जाकर लोगों को पार्टी से जोड़ा और केवल एक साल में करीब 10 हजार नए सदस्यों को पार्टी के साथ जोड़ा
उनकी संगठन क्षमता और समर्पण को देखते हुए उन्हें 1981 में जिला अध्यक्ष बनाया गया. खास बात यह रही कि उन्होंने लगातार 7 सालों तक इस जिम्मेदारी को निभाया. उस समय किसी नेता का इतने लंबे समय तक एक ही संगठनात्मक पद पर बने रहना बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता था.