श्रीनगर में ड्रग तस्करों पर बड़ा प्रहार, पुलिस ने 2.74 करोड़ की संपत्ति की कुर्क

श्रीनगर पुलिस ने नशा तस्करी के आरोपी की 2.74 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है. यह कार्रवाई 100 दिवसीय नशा मुक्ति अभियान के तहत की गई, जिससे तस्करों की आर्थिक ताकत कमजोर करने का लक्ष्य है.

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Sagar Bhardwaj

नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे 100 दिवसीय नशा मुक्ति जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत श्रीनगर पुलिस ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित ड्रग तस्कर की करीब 2.74 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति कुर्क कर ली. पुलिस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्तियों पर शिकंजा कसना और तस्करी के नेटवर्क को आर्थिक रूप से कमजोर करना है.

मकान और जमीन की गई कुर्क

पुलिस के अनुसार कुर्क की गई संपत्ति में श्रीनगर के सौरा क्षेत्र स्थित औउंता भवन में बना दो मंजिला आवासीय मकान और उससे जुड़ी 12 मरला भूमि शामिल है. यह संपत्ति मुबशिर अहमद हकीम पुत्र अब्दुल हमीद हकीम के नाम पर पंजीकृत है. पुलिस का दावा है कि आरोपी के खिलाफ अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े कई मामले पहले से दर्ज हैं.

एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई

यह कार्रवाई पुलिस थाना सफाकदल में दर्ज एफआईआर संख्या 142/2025 के आधार पर की गई. मामला एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8/22 के तहत दर्ज है. जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों के आधार पर संबंधित संपत्ति को अवैध गतिविधियों से अर्जित माना गया, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे कुर्क कर लिया गया. अधिकारियों के अनुसार संपत्ति का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 2.74 करोड़ रुपये है.


अभियान का मकसद आर्थिक नेटवर्क तोड़ना

श्रीनगर पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और युवाओं के भविष्य से जुड़ी गंभीर चुनौती है. इसी वजह से अभियान के तहत ऐसे लोगों की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है, ताकि नशे के कारोबार से होने वाले आर्थिक लाभ को समाप्त किया जा सके और तस्करी में शामिल गिरोहों की वित्तीय क्षमता पर प्रभावी चोट पहुंचाई जा सके.

जनता से सहयोग की अपील

पुलिस ने नागरिकों से नशा तस्करी से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी निकटतम पुलिस थाने या आधिकारिक हेल्पलाइन पर देने की अपील की है. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. पुलिस ने कहा कि नशामुक्त समाज के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनसहभागिता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बेहद आवश्यक है.