लगातार बारिश और बाढ़ से तबाह हुए हिमाचल प्रदेश और पंजाब की स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मैदान में उतरने जा रहे हैं. रविवार को वे दोनों राज्यों का दौरा करेंगे. पीएम मोदी का यह दौरा राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ प्रभावित लोगों से सीधे संवाद पर केंद्रित होगा.
प्रधानमंत्री मोदी रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा पहुंचेंगे. यहां वे उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेंगे. इसके अलावा वे प्रभावित लोगों से मुलाकात करेंगे और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा मित्र टीमों से भी बातचीत करेंगे. पीएम मोदी प्रदेश के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे करेंगे ताकि नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके.
हिमाचल दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी पंजाब का रुख करेंगे. वे शाम 4:15 बजे गुरदासपुर पहुंचेंगे और यहां बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे करेंगे. इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत कार्यों की स्थिति की समीक्षा करेंगे. पीएम मोदी प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनेंगे और राहतकर्मियों से बातचीत कर अब तक की प्रगति का जायजा लेंगे.
Prime Minister Narendra Modi will visit Himachal Pradesh and Punjab tomorrow to review the flood-related situation. He will undertake an aerial survey of the flood and landslide-hit areas in Himachal Pradesh. At around 1:30 PM, he will reach Kangra, Himachal Pradesh, where he… pic.twitter.com/02peDgkX5i
— ANI (@ANI) September 8, 2025
हिमाचल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य में मचे तबाही को लेकर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा स्वागत योग्य है. ठाकुर ने कहा 'इस आपदा ने हिमाचल को बुरी तरह झकझोर दिया है. शायद ही कोई जिला बचा हो जहां तबाही न हुई हो. नुकसान इतना बड़ा है कि राज्य को संभलने में कई साल लग जाएंगे.'
प्रधानमंत्री के दौरे से स्थानीय लोगों और सरकार को उम्मीद है कि केंद्र स्तर पर राहत पैकेज और मदद तेज होगी. आपदा से जूझ रहे दोनों राज्यों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास की चुनौती बड़ी है. ऐसे में पीएम मोदी की सीधी समीक्षा और प्रभावित परिवारों से मुलाकात से राहत कार्यों में तेजी आने की संभावना है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दौरे से न केवल राहत कार्यों में समन्वय बढ़ेगा बल्कि राज्यों की जरूरतों के अनुरूप अतिरिक्त मदद भी मिल सकेगी.