AI video row: बिहार की राजनीति में एक बार फिर एआई (AI) जनरेटेड वीडियो को लेकर घमासान छिड़ गया है. वोट अधिकार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मां की गाली देने पर मचे बवाल के बीच, बिहार कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से 36 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया.
इस वीडियो में पीएम मोदी और उनकी दिवंगत मां हीराबेन से मिलती-जुलती महिला दिखाई गईं. कैप्शन में लिखा था 'साहब के सपनों में आईं मां, देखिए रोचक संवाद.' वीडियो में दिखाया गया कि मोदी के सपने में मां कह रही हैं- 'राजनीति के नाम पर कितना गिरोगे?'
वीडियो सामने आते ही भाजपा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. पार्टी ने इसे प्रधानमंत्री और उनकी मां का अपमान करार दिया. भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने राजनीतिक बहस का स्तर इतना नीचे गिरा दिया है, जो लोकतंत्र में अस्वीकार्य है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा 'राहुल गांधी अब इतना नीचे गिर गए हैं कि अपनी मां की इज्जत का ख्याल नहीं रखते, तो दूसरे की मां का सम्मान कहां से करेंगे.'
साहब के सपनों में आईं "माँ"
— Bihar Congress (@INCBihar) September 10, 2025
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बेगूसराय में मीडिया से बात करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस का एआई वीडियो केवल राजनीतिक दुर्भावना नहीं है, बल्कि एक गंभीर अपराध भी है. उन्होंने मांग की कि कांग्रेस नेताओं को इसके लिए सामाजिक और कानूनी तौर पर सजा मिलनी चाहिए. सिंह ने कहा 'मोदी जी की मां का एआई वीडियो बनाना बहुत गलत है. इन पर फ्रॉड का केस होना चाहिए और जांच होनी चाहिए. राहुल गांधी और कांग्रेस साबित करना चाहते हैं कि वे फर्जीवाड़े और अनैतिक राजनीति के प्रतीक हैं.'
इतिहास गवाह है कि सत्ता के निर्णायक क्षणों में नेहरू देशहित से अधिक एडविना माउंटबैटेन की मोह-माया में उलझे रहे। जब भारत को मज़बूत नेतृत्व चाहिए था, तब वे निजी मोह में बंधकर बार-बार सरेंडर करते रहे। निजी रिश्तों ने राष्ट्रीय हितों को कुचल दिया। एडविना की मोहपाश में जकड़े नेहरू ने… https://t.co/6rkEJvR0DD pic.twitter.com/5A6AnNGBCw
— Shandilya Giriraj Singh (@girirajsinghbjp) September 12, 2025
गिरिराज सिंह ने केवल एआई वीडियो की निंदा तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस के खिलाफ बड़ा पलटवार भी किया. उन्होंने एक्स पर पंडित नेहरू और एडविना माउंटबैटेन की तस्वीर साझा करते हुए लिखा 'यह इतिहास गवाह है कि सत्ता के निर्णायक क्षणों में नेहरू देशहित से अधिक एडविना की मोह-माया में उलझे रहे. जब भारत को मजबूत नेतृत्व चाहिए था, तब वे निजी रिश्तों के मोह में बार-बार सरेंडर करते रहे और राष्ट्रीय हितों की बलि चढ़ाई.'