नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य के विकास की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया. उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए भारत अब आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में परमाणु ऊर्जा, तेल और प्राकृतिक गैस की खोज तथा स्वदेशी क्षमताओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश ने कई ऐसे क्षेत्रों को आगे बढ़ाया है जिन्हें कभी असंभव माना जाता था और अब ऊर्जा के क्षेत्र में भी वही परिवर्तन दिखाई देगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक विकास का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार है. उन्होंने बताया कि इस दशक के भीतर पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है. सरकार का उद्देश्य स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोतों को मजबूत बनाकर भविष्य की जरूरतों को पूरा करना है.
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने तेल और प्राकृतिक गैस के लिए अपतटीय क्षेत्रों को खोल दिया है. बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए सरकार अब गहरे समुद्र में नए भंडारों की खोज पर तेजी से काम कर रही है. उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष ‘समुद्र मंथन’ पहल की घोषणा की गई थी. अब इस अभियान को गति देने के लिए 85,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे ऊर्जा संसाधनों की खोज और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लंबे समय तक दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता. उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा का भी विषय बताया. उनके अनुसार ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्वदेशी’ और ‘लोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियान देश की क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं. हर भारतीय की भागीदारी से ही ऊर्जा और उद्योग दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता संभव होगी.
वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने देश में डर का माहौल बनाने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों की कमी जैसी अफवाहें जानबूझकर फैलाई गईं. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की समय पर उठाई गई पहल के कारण देश में गैस, ईंधन और यूरिया की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई. उन्होंने इसे मजबूत योजना और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन का परिणाम बताया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार तेजी से हुआ है और अब देश के 700 शहरों में पाइपलाइन के माध्यम से गैस की सुविधा उपलब्ध है. इससे लाखों परिवारों और उद्योगों को अधिक सुविधाजनक ऊर्जा मिल रही है. उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ाते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ेगा. उनके अनुसार आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था ही आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति को नई ऊंचाई देगी.