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India Daily

'वंदे मातरम एकता का मंत्र, कई पीढ़ियों को किया प्रेरित', 150 साल के उत्सव पर PM मोदी ने किस पर विभाजन के लिए बोला हमला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर 7 नवंबर, 2025 को एक साल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया.

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Edited By: Reepu Kumari
'वंदे मातरम एकता का मंत्र, कई पीढ़ियों को किया प्रेरित', 150 साल के उत्सव पर PM मोदी ने किस पर विभाजन के लिए बोला हमला?
Courtesy: PTI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया और इस उपलब्धि के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया. उन्होंने कहा कि यह वर्षगांठ देश भर के नागरिकों को प्रेरित करेगी और एकता की भावना को और मज़बूत करेगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'वंदे मातरम भारत की एकता का सच्चा प्रतीक है क्योंकि इसने पीढ़ियों को प्रेरित किया है.' उन्होंने आगे कहा, 'आज जब हम वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे कर रहे हैं, तो यह हमें नई प्रेरणा देगा और देश के लोगों को नई ऊर्जा से भर देगा.'

उन्होंने कहा, 'वंदे मातरम् की मुख्य भावना भारत, मां भारती है...भारत एक राष्ट्र के रूप में वो कुंदन बन कर उभरे, जो अतीत की हर चोट सहता रहा और सहकार भी अमरत्व को प्राप्त कर गया,' उन्होंने कहा, भारत एक ऐसे राष्ट्र के रूप में है जो अपने सामने आने वाली हर चुनौती से मजबूत होकर उभरा है.

 'विभाजन के बीज बोए'

प्रधानमंत्री मोदी ने गीत के इतिहास को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का भी उल्लेख किया और कहा कि 1937 में वंदे मातरम के केवल चुनिंदा पदों को मंजूरी देने के फैसले से वैचारिक मतभेद पैदा हुए, जिसने बाद में भारत के विभाजन में योगदान दिया.

उन्होंने कहा कि 'इसकी भावना और महत्व का एक हिस्सा अलग हो गया,' और तर्क दिया कि इस विभाजन ने 'भारत के अंततः विभाजन के बीज बोए.' प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी से ऐतिहासिक संदर्भ को समझने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि 'वही विभाजनकारी मानसिकता आज भी राष्ट्र के लिए एक चुनौती बनी हुई है.'

घमासान के बीच बयान

उनकी यह टिप्पणी राष्ट्रीय गीत की विरासत को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच नए सिरे से छिड़े राजनीतिक घमासान के बीच आई है. भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने 1937 में जवाहरलाल नेहरू के राष्ट्रपति काल में कांग्रेस पर वंदे मातरम को सांप्रदायिक बनाने का आरोप लगाया और कहा कि नेहरू को डर था कि यह गीत मुसलमानों को चिढ़ा सकता है - यह दावा उन्होंने नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बीच हुए पत्राचार के आधार पर किया.

सीआर केसवन ने कहा, 'कांग्रेस ने इस गीत को धर्म से जोड़कर ऐतिहासिक भूल की. ​​नेहरू के शासनकाल में देवी दुर्गा के आह्वान वाले छंदों को जानबूझकर हटा दिया गया.'

2025 से 2026 तक राष्ट्रव्यापी समारोह

इस कार्यक्रम के साथ 7 नवंबर, 2025 से 7 नवंबर, 2026 तक एक वर्ष तक चलने वाले राष्ट्रीय उत्सव का औपचारिक शुभारंभ हुआ, जो उस गीत की 150 वर्ष की यात्रा का स्मरण कराता है जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी और जो आज भी राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है.

वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने अक्षय नवमी के दिन की थी, जो 7 नवंबर 1875 को थी. यह गीत पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ के एक भाग के रूप में प्रकाशित हुआ था.

प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष के समारोह राष्ट्र को उस विरासत, आदर्शों और सांस्कृतिक शक्ति से पुनः जुड़ने का अवसर प्रदान करेंगे जिसका प्रतिनिधित्व वंदे मातरम करता है.