PM Modi Birthday: बचपन के दोस्त ने मोदी को बताया ‘श्रीकृष्ण’, खुद को कहा ‘सुदामा’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से पहले वडनगर के उनके बचपन के दोस्त शामलदास मोदी की चिट्ठी सामने आई है. उन्होंने पुराने रिश्ते को याद करते हुए पीएम मोदी को श्रीकृष्ण और खुद को सुदामा बताया.
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को जन्मदिन से पहले गुजरात के वडनगर से जुड़ी एक चिट्ठी चर्चा में है. उनके बचपन के दोस्त शामलदास मोदी ने अपने पुराने साथी को याद करते हुए उन्हें ‘श्रीकृष्ण’ और खुद को ‘सुदामा’ बताया है. चिट्ठी में उन्होंने मोदी के लंबे सार्वजनिक जीवन, उनकी उपलब्धियों और वडनगर के विकास का उल्लेख किया. दोस्त ने लिखा कि जिस साथी के साथ बचपन बीता, उसे आज देश की जिम्मेदारी संभालते देखकर उन्हें गर्व होता है.
शामलदास मोदी ने अपनी चिट्ठी में नरेंद्र मोदी के साथ बचपन के दिनों की दोस्ती को याद किया. उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘श्रीकृष्ण’ और खुद को ‘सुदामा’ कहकर इस रिश्ते को भावनात्मक अंदाज में सामने रखा. उनके मुताबिक, समय के साथ दोनों की जिंदगी अलग रास्तों पर आगे बढ़ी, लेकिन बचपन में बना यह रिश्ता आज भी उनके लिए खास है.
दोस्त की कामयाबी पर जताया गर्व
चिट्ठी में शामलदास ने लिखा कि नरेंद्र मोदी ने जीवन में जो लक्ष्य तय किया, उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की. उन्होंने अपने दोस्त की उपलब्धियों पर गर्व जताया और कहा कि उनकी सफलता देखकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. उनके लिए प्रधानमंत्री की मौजूदा पहचान से ज्यादा महत्व उस दोस्त का है, जिसे उन्होंने वडनगर में बचपन से जाना.
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25 साल के सार्वजनिक जीवन का किया जिक्र
शामलदास ने नरेंद्र मोदी के करीब 25 साल के सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया. उन्होंने उन्हें ‘नूतन भारत का शिल्पकार’ बताया. चिट्ठी में मोदी के काम करने के तरीके की तारीफ करते हुए कहा गया है कि वह जिस काम को करने की ठान लेते हैं, उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं. यह पूरा उल्लेख एक पुराने दोस्त की नजर से मोदी के सफर को देखने जैसा है.
वडनगर की विरासत पर भी लिखी बात
चिट्ठी में वडनगर के विकास और शहर की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने का भी उल्लेख है. वडनगर मेहसाणा जिले में स्थित है और नरेंद्र मोदी के शुरुआती जीवन से इसका गहरा संबंध रहा है. शामलदास ने शहर की पहचान और विरासत को आगे लाने के लिए हुए प्रयासों का जिक्र करते हुए मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया.
भारत की वैश्विक पहचान का भी जिक्र
चिट्ठी के अंत में शामलदास ने भारत की दुनिया में बढ़ती पहचान का उल्लेख किया. उन्होंने अमेरिका समेत अलग-अलग देशों में भारत और नरेंद्र मोदी की चर्चा होने की बात लिखी. इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और लंबे जीवन तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना की. चिट्ठी का सबसे खास पहलू उसका व्यक्तिगत अंदाज है, जिसमें राजनीतिक पद से ज्यादा बचपन की दोस्ती को जगह दी गई है.