पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की तैयारी में सरकार? कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से OMCs पर बढ़ा दबाव

ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती है. तेल कंपनियों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई गई है.

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Dhiraj Kumar Dhillon

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द ही बड़ी बढोतरी हो सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा खपत कम करने की अपील को इस बात का संकेत माना जा रहा है। दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के चलते लंबे समय से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और तेल कंपनियों पर भार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ना तय माना जा रहा है.

तेल आयात के लिए अहम रास्ता है होर्मुज जलडमरूमध्य

पेट्रो पदार्थों के अधिकतर आयात के लिए भारत खाड़ी देशों पर निर्भर है. तेल का आयात करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य एक अहम रास्ता है. तनाव बढ़ने के बाद हमारे कुछ जहाज होर्मुज से पास जरूर हुए हैं लेकिन अभी भी एक दर्जन से अधिक जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. बता दें कि फरवरी के अंत में अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित है. ताजा घटनाक्रमों के मुताबिक यह तनाव जल्द कम होने के आसार नहीं हैं. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच लगातार पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय में बैठकें चल रही हैं. सरकार महंगाई, राजकोषीय घाटे और ऊर्जा की कीमतों के बीच तालमेल स्थापित करने के प्रयास में जुटी है.

तेल कंपनियों को एक लाख करोड़ के नुकसान का अनुमान

इस तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) की दो लाख करोड़ रुपये की अंडर डिलीवरी का सामना करना पड़ रहा है. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस तिमाही में तेल कंपनियों को करीब एक लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ सकता है. केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने भी संकेत दिए हैं कि नुकसान बढ़ने के चलते तेल की कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं.

69 से बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचे भाव

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 104.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. फरवरी में  यह आंकड़ा 69.01 डॉलर का था. उस समय वेंट क्रूड ऑयल की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दर 72.50 डॉलर प्रति बैरल थी और अब बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. एनालिसिस सेल के मुताबिक यह दर बीच में 120 डॉलर तक भी पहुंच गई थी.

एक्साइज कटौती से 14000 करोड़ का नुकसान

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने के बाद जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़नी शुरू हुईं तो भारत सरकार ने एक्साइज डयूटी में कटौती करके तेल कंपनियों को घाटा बर्दाश्त करने के लिए मदद की गई और उपभोक्ताओं को कच्चे तेल की बढ़ी दरों का कोई नुकसान नहीं हुआ. आंकड़े बताते हैं कि सरकार को एक्साइज कटौती से अब तक 14000 करोड़ का नुकसान हो चुका है.

2022 के बाद नहीं बढ़ाए गए भाव 

इन हालातों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा खपत कम करने की अपील से एक बार फिर पेट्रोल- डीजल के भाव बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि दाम कब बढ़ेंगे और कितने बढ़ेंगे, इस संबंध में अभी तक कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है. बता दें कि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2022 के बाद से अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है.