Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को नाकाम किया. इस सफलता में प्राइवेट कंपनियों की भूमिका अहम रही है. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज, पारस डिफेंस, आइडिया फोर्ज और आईजी ड्रोन जैसी कंपनियों ने ड्रोन, रडार और सैटेलाइट तकनीक से सेना को मजबूत किया है. पहले केवल सरकारी और विदेशी तकनीक पर निर्भरता थी, लेकिन अब प्राइवेट सेक्टर ने रक्षा क्षेत्र में क्रांति ला दी है.
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TAS) ने रडार, मिसाइल और UAV सिस्टम दिए. यह कंपनी गुजरात के वडोदरा में एयरबस के साथ C-295 मिलिट्री एयरक्राफ्ट बनाती है. पारस डिफेंस ने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और ऑप्टिक्स में नए मानक बनाए हैं. यह इजरायली फर्मों के साथ ड्रोन कैमरा तकनीक पर काम कर रही है. अल्फा डिजाइन ने स्काईस्ट्राइकर जैसे कामिकेज ड्रोन बनाए, जो ऑपरेशन में सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल हुए थे. आइडिया फोर्ज का SWITCH UAV और NETRA V2 क्वाडकॉप्टर सेना की निगरानी में शामिल हैं. आईजी ड्रोन ने सर्वेक्षण और टोही कार्यों में मदद की है.
लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को 13,369 करोड़ रुपये के रडार और हथियार सिस्टम कॉन्ट्रैक्ट मिले. अडानी डिफेंस ने उत्तर प्रदेश में गोला-बारूद और मिसाइल फैक्ट्रियां खोलीं, जो भारत की 25% जरूरत पूरी करेंगी. भारत फोर्ज ने भी रक्षा उत्पादन में हिस्सेदारी बढ़ाई. ये कंपनियां स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं.
1990 के दशक में भारत ने इजरायली UAV जैसे हेरॉन इस्तेमाल किए. कारगिल युद्ध में रियल-टाइम जानकारी की जरूरत ने स्वदेशी ड्रोन विकास को गति दी. आज सेना के पास बड़ा UAV बेड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर में सोलर इंडस्ट्रीज के नागस्त्र-1 और न्यूस्पेस रिसर्च के ड्रोन स्वार्म ने सामरिक हमले और निगरानी में अहम भूमिका निभाई. गरुड़ एयरोस्पेस का जटायु और स्काईपॉड जैसे ड्रोन सियाचिन जैसे क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स सपोर्ट दे रहे हैं.
ऑपरेशन सिंदूर में कार्टोसैट और रिसैट सैटेलाइट्स ने निगरानी में मदद की. स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 (SBS-3) प्रोग्राम के तहत दक्षिण भारत की तीन प्राइवेट कंपनियां 31 सैटेलाइट बना रही हैं. यह GEO और LEO में 52 सैटेलाइट्स के साथ भारत की अंतरिक्ष क्षमता बढ़ाएगा. इसरो 21 सैटेलाइट्स देगा. दिगंतरा और पिक्सेल जैसी कंपनियां स्पेस सर्विलांस में योगदान दे रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को स्वदेशी तकनीक की जीत बताया. 2021 से ड्रोन आयात पर प्रतिबंध और 120 करोड़ रुपये की PLI स्कीम ने स्थानीय नवाचार को बढ़ावा दिया. FY24 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन 1.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा. ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया 2030 तक भारत को ग्लोबल ड्रोन हब बनाने का लक्ष्य रखता है. FY25 में रक्षा निर्यात 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की बड़ी हिस्सेदारी है.