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APJ Abdul Kalam Anniversary: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर याद आए उनके अनकहे किस्से, पीएम मोदी समेत बड़े नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उनके जीवन के कई अनसुने और प्रेरक प्रसंगों को याद किया गया. उनकी सादगी, सेवा भाव, धार्मिक समरसता और वैज्ञानिक सोच ने उन्हें एक आदर्श राष्ट्रपति और मानव बनाया.

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APJ Abdul Kalam Anniversary: भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ के नाम से मशहूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर कलाम को याद किया. इस मौके पर उनके जीवन से जुड़े कुछ अनसुने, लेकिन बेहद प्रेरणादायक किस्से भी एक बार फिर चर्चा में हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉ. कलाम को 1998 में भारत रत्न से नवाजा गया था. उस समारोह में वह बेहद असहज थे, क्योंकि उन्हें औपचारिक वस्त्र पसंद नहीं थे. उन्हें चमड़े के जूते और टाई से नफरत थी. उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद सूट के गले के पास से कटवाया ताकि वह सहज महसूस कर सकें, जिसे बाद में 'कलाम सूट' कहा गया.

 

डॉ. कलाम की सादगी 

कलाम की सादगी का सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब उन्होंने राष्ट्रपति भवन में ठहरने वाले अपने परिवार के 52 सदस्यों का पूरा खर्च अपनी जेब से उठाया. यहां तक कि अजमेर शरीफ की यात्रा के लिए बस का किराया और हर कप चाय का हिसाब भी रखा. उन्होंने इफ्तार भोज के पैसे को अनाथालयों को दान कर दिया और खुद एक लाख रुपये का गुप्त दान भी दिया.

गीता व कुरान दोनों को किया आत्मसात 

वह सुबह की नमाज कभी नहीं छोड़ते थे और गीता व कुरान दोनों पढ़ते थे. स्वामी विवेकानंद और थिरुवल्लुवर के विचारों को भी आत्मसात करते थे. उन्होंने सत्य साईं बाबा से मुलाकात की, जिससे कुछ वामपंथी असहमत थे लेकिन उनका मानना था कि आस्था और वैज्ञानिक सोच में विरोध नहीं, संतुलन हो सकता है.

मोर की करवाई सर्जरी 

एक बार राष्ट्रपति भवन में एक मोर के बीमार होने पर कलाम ने उसकी सर्जरी करवाई और उसे पूरी तरह स्वस्थ होने तक ICU में रखने का निर्देश दिया. वहीं, उन्होंने तंजानिया के 24 बच्चों की मुफ्त हार्ट सर्जरी भारत में करवाई  जिसकी पूरी व्यवस्था उन्होंने निजी संपर्कों से करवाई थी.

डॉ. कलाम की निष्पक्षता

कलाम की निष्पक्षता तब भी दिखी जब उन्होंने फील्डमार्शल सैम मानेक शॉ के बकाया भत्तों की जानकारी मिलने पर खुद पहल कर उन्हें दिलवाया. आज जब देश उन्हें याद कर रहा है, तो यह स्पष्ट है कि कलाम न केवल एक वैज्ञानिक और राष्ट्रपति थे, बल्कि एक ऐसे मानव थे जिनकी सोच, सादगी और सेवा का भाव पीढ़ियों तक प्रेरणा देता रहेगा.