'PoK वाले आज भारत में शामिल होने को लड़ रहे होते, अगर...', उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा
स्वतंत्रता दिवस पर उमर अब्दुल्ला ने PoK को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने 2019 के फैसले, राज्य का दर्जा, लोकतंत्र और संघवाद पर सरकार का रुख सामने रखा.
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तिरंगा फहराया. अपने संबोधन में उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए दावा किया कि अगर 2019 में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति नहीं बदली गई होती, तो आज PoK के लोग भारत के साथ फिर जुड़ने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे होते.
PoK को लेकर क्या बोले सीएम
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि PoK में सामने आ रहे विरोध प्रदर्शनों को देखकर 1947 के घटनाक्रम और तत्कालीन परिस्थितियों को समझा जा सकता है. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले का मुकाबला किया था. मुख्यमंत्री ने दोहराया कि PoK को भारत का हिस्सा माना जाता है और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इस क्षेत्र के लिए सीटें खाली रखी गई हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में वहां के लोग भारत के साथ जुड़ेंगे.
Also Read
2019 के फैसले का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अगस्त 2019 के संवैधानिक बदलावों को भी अपने भाषण का अहम हिस्सा बनाया. उन्होंने कहा कि उस समय जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख- में विभाजित किया गया. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार अगस्त 2019 में हटाई गई संवैधानिक गारंटियों और विशेष अधिकारों की बहाली के लिए राजनीतिक रूप से प्रयास जारी रखेगी.
पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को उसका पुराना राज्य का दर्जा वापस मिलना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि सरकार विकास, जनता के अधिकारों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए काम कर रही है. उनके मुताबिक पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने से क्षेत्र में विकास और खुशहाली को गति मिलेगी.
संघवाद को बताया लोकतंत्र की ताकत
मुख्यमंत्री ने भारत के संघीय ढांचे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संघवाद देश की बड़ी ताकत हैं और राज्यों को अधिक अधिकार देना जरूरी है. उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि संघवाद केवल राज्य का दर्जा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि राज्यों की स्वायत्त भूमिका भी मजबूत होनी चाहिए.
NEET-JEE और भर्ती परीक्षाओं पर सवाल
उमर अब्दुल्ला ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और स्थानीय भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि NEET, NTA और JEE जैसी व्यवस्थाओं के कारण राज्यों की भूमिका पहले की तुलना में बदली है. साथ ही भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कायम रखना बेहद जरूरी है.
सरकार, विपक्ष और मीडिया की भूमिका
भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र में सरकार, विपक्ष और मीडिया की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के हित में काम करना चाहिए, विपक्ष को सवाल पूछकर जवाबदेही तय करनी चाहिए और मीडिया को निष्पक्ष व तथ्यपरक खबरें लोगों तक पहुंचानी चाहिए. उनके मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए तीनों पक्षों को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी.