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India Daily

199 करोड़ रुपये के दान पर कोई छूट नहीं, कांग्रेस को टैक्स राहत पर ट्रिब्यूनल का तगड़ा झटका

आयकर न्यायाधिकरण ने कर अधिकारियों के निर्णय को बरकरार रखते हुए कहा कि पार्टी को उस फाइनेंशिल ईयर के दौरान प्राप्त दान पर आयकर का भुगतान करना होगा.

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Edited By: Mayank Tiwari
199 करोड़ रुपये के दान पर कोई छूट नहीं, कांग्रेस को टैक्स राहत पर ट्रिब्यूनल का तगड़ा झटका
Courtesy: Social Media

कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका देते हुए, आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 199 करोड़ रुपये से अधिक की आय पर कर मांग के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया. पार्टी ने दावा किया था कि यह राशि दान से प्राप्त हुई थी और इसे आयकर से छूट मिलनी चाहिए, लेकिन समय पर रिटर्न दाखिल न करने और नकद दान से संबंधित नियमों के उल्लंघन के कारण यह दावा खारिज हो गया.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने 2 फरवरी 2019 को अपनी आयकर रिटर्न दाखिल की और आयकर अधिनियम की धारा 13ए के तहत 199.15 करोड़ रुपये की छूट का दावा करते हुए शून्य आय घोषित की. हालांकि, यह रिटर्न मूल्यांकन वर्ष 2018-19 के लिए तय अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2018 के बाद दाखिल की गई थी, जो धारा 139 के तहत अनिवार्य है. 

समय पर रिटर्न दाखिल करने में विफलता

आईटीएटी ने कहा कि छूट के प्रावधानों की व्याख्या सख्ती से की जानी चाहिए. "राजनीतिक दलों को धारा 139(1) के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना होगा, जैसा कि धारा 139(4बी) में उल्लेख किया गया है, न कि धर्मार्थ ट्रस्टों की तरह, जिन्हें धारा 12ए के तहत अधिक छूट है," न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया.

नकद दान पर नियमों का उल्लंघन

सितंबर 2019 में जांच के दौरान, मूल्यांकन अधिकारी ने पाया कि कांग्रेस ने 14.49 लाख रुपये के नकद दान स्वीकार किए, जो प्रति दानदाता 2,000 रुपये से अधिक थे. यह आयकर अधिनियम की धारा 13ए(डी) का उल्लंघन करता है, जो वित्त अधिनियम 2017 के संशोधन के बाद सभी दानों को बैंकिंग चैनलों के माध्यम से स्वीकार करने को अनिवार्य करता है. इस उल्लंघन के कारण, 6 जुलाई 2021 के मूल्यांकन आदेश ने पूरी छूट को खारिज कर दिया, जिससे कुल राशि कर योग्य हो गई. आयकर आयुक्त (अपीलीय) ने 28 मार्च 2023 को इस फैसले को बरकरार रखा.

अपील और राहत से इनकार

2024 में, आईटीएटी ने कांग्रेस को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और हालिया फैसले में उनकी अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया. पार्टी ने तर्क दिया कि धारा 139(4) के तहत देर से रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन न्यायाधिकरण ने इसे अस्वीकार कर दिया. इसके अलावा, कांग्रेस की सकल प्राप्तियों से खर्चों में कटौती की वैकल्पिक मांग भी खारिज कर दी गई. 2016 के दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए, न्यायाधिकरण ने कहा कि धारा 13ए के तीसरे प्रावधान का उल्लंघन ऐसी राहत को रोकता है.