तीन दिन के अनशन में अभिजीत दीपके की हो गई थी हालत खराब, वहीं 9 दिन के अनशन के बाद भी आंदोलन में उतरे महतो
रांची में JPSC और JSSC से जुडी मांगों को लेकर हजारों छात्रों ने विधानसभा मार्च किया. 9 दिन से अनशन कर रहे देवेंद्र नाथ महतो भी एंबुलेंस और स्ट्रेचर के जरिए मार्च में शामिल हुए.
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गडबडी के विरोध में हजारों छात्रों ने विधानसभा मार्च किया. इस मार्च में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल हुए. खास बात यह रही कि वह पिछले 9 दिनों से अनशन पर हैं और इसके बावजूद एंबुलेंस और स्ट्रेचर के जरिए आंदोलनकारियों के साथ मार्च में आगे बढे.
छात्र पुराने विधानसभा परिसर से नई विधानसभा की ओर बढे. रास्ते में पुलिस ने कई स्तर की बैरिकेडिंग कर रखी थी. प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार कर लिए. इसके बाद शहीद मैदान के पास छात्र सडक पर बैठ गए. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की भी हुई. आंदोलन के दौरान छात्र संगठनों के वालंटियर भीड को नियंत्रित करने की कोशिश करते रहे.
एंबुलेंस और स्ट्रेचर से मार्च में पहुंचे महतो
देवेंद्र नाथ महतो शुरुआत में चार दिनों तक पानी तक नहीं लेने का दावा कर चुके हैं. सोमवार को 9 दिन के अनशन के बावजूद वह आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे. हाथ में शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर वह कुछ दूरी तक पैदल चले. इसके बाद उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें एंबुलेंस में बैठाया गया.
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कुछ दूरी तय करने के बाद आंदोलनकारियों ने स्ट्रेचर को कंधे पर उठाया और महतो को लेकर आगे बढे. उन्हें इस हालत में मार्च में शामिल देखकर छात्रों ने समर्थन में नारे लगाए और उनका उत्साह बढाया.
कांटेदार तारों से ज्यादा कष्ट हुआ
मार्च के दौरान मीडिया से बातचीत में देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि उन्हें लंबे अनशन से ज्यादा कष्ट पुलिस की ओर से लगाए गए कांटेदार तारों को देखकर हुआ. उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की.
महतो ने छात्रों से क्या की अपील?
महतो ने छात्रों से संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान किसी तरह की हिंसा या अनहोनी नहीं होनी चाहिए. उनका कहना था कि यदि आंदोलन उग्र होता है तो छात्रों को चोट लगने का खतरा बढ सकता है.
महतो ने यह भी कहा कि वह अपनी स्थिति के बावजूद आंदोलन में इसलिए शामिल हुए क्योंकि किसी भी समय हालात बिगड सकते हैं. उन्होंने आशंका जताई कि भगदड, आंसू गैस या पुलिस कार्रवाई की स्थिति में वह खुद तेजी से वहां से नहीं हट पाएंगे.
अभिजीत दीपके ने तीन दिन के अनशन का दिया था हवाला
इस पूरे घटनाक्रम की तुलना दिल्ली में हुए एक छात्र आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके की भूमिका से भी की जा रही है. 20 मार्च को जंतर मंतर से संसद मार्च के दौरान दीपके ट्रक पर मौजूद रहे थे और जमीन पर मार्च में शामिल नहीं हो पाए थे.
बाद में एक इंटरव्यू में दीपके ने बताया था कि वह तीन दिन से अनशन पर थे और उन्हें चक्कर आ गया था. उन्होंने कहा था कि साथियों की सलाह पर वह ट्रक पर सवार होकर प्रदर्शनकारियों को मार्गदर्शन दे रहे थे. दीपके के मुताबिक अगर वह अनशन पर नहीं होते तो वह खुद जमीन पर उतरकर मार्च का नेतृत्व करते.
वहीं रांची में देवेंद्र नाथ महतो की 9 दिन के अनशन के बावजूद विधानसभा मार्च में मौजूदगी ने आंदोलन के दौरान उनके समर्थकों के बीच अलग तरह का उत्साह पैदा किया. छात्रों का आंदोलन JPSC और JSSC परीक्षा तथा नियुक्ति प्रक्रिया से जुडी मांगों को लेकर जारी है.