'यह हमारा क्षेत्र है...' नेपाल ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जताई आपत्ति
नेपाल ने लिपुलेख के रास्ते होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई है. इसक चलते उन्होंने भारत और चीन को राजनयिक विरोध पत्र भेजा है.
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर जाने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग की घोषणा के बाद एक पुराना सीमा विवाद फिर से गहरा गया है. नेपाल ने इस प्रस्तावित मार्ग पर ऐतराज जताया है. उसने इसे अपना अंग बताया. इस मामले को लेकर काठमांडू ने नई दिल्ली और बीजिंग दोनों देशों से अपना अपना विरोध दर्ज कराया है. हालांकि, दोनों देशों ने आगे का रास्ता निकालने के बातचीत पर विशेष जोर दिया है.
नेपाल का दावा
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अपना रुख साफ कर दिया है. सरकार का मजबूती से मानना है कि 1816 की ऐतिहासिक सुगौली संधि के अनुसार लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल के ही अभिन्न अंग हैं. नेपाल ने राजनयिक माध्यमों से भारत और चीन को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है. नेपाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह क्षेत्र आधिकारिक तौर पर उसी के इलाके में आता है.
भारत का सबूत
नेपाल की इस आपत्ति के जवाब में भारत ने भी अपना रुख स्पष्ट रखा है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में उनका नजरिया हमेशा एक जैसा रहा है. लिपुलेख दर्रा 1954 से ही पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक स्थापित मार्ग रहा है. भारत ने नेपाल के क्षेत्रीय दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह के एकतरफा दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इन्हें किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
नेपाल ने जाहिर की चिंता
काठमांडू ने नई दिल्ली से बार-बार आग्रह किया है कि वह इस विवादित क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि को तुरंत प्रभाव से रोक दे. नेपाल सरकार का कहना है कि भारत को लिपुलेख इलाके में सड़क निर्माण, मार्ग विस्तार, सीमा व्यापार या तीर्थयात्रा से जुड़ी कोई गतिविधि नहीं करनी चाहिए. नेपाल ने अतीत में भी लगातार इन चिंताओं को प्रमुखता से उठाया है. इसके साथ ही काठमांडू ने भारत और चीन दोनों को अपने क्षेत्रीय दावों की फिर से याद दिलाई है.
बातचीत से समाधान निकालने की उम्मीद
नेपाल ने अपनी आपत्ति को कड़ा कर दिया है, लेकिन उसने संकेत दिया है कि वह समाधान के लिए हमेशा तैयार है. नेपाल का कहना है कि वह भारत के साथ अपने संबंधों की भावना का बहुत सम्मान करता है. वह ऐतिहासिक तथ्यों और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से इस पुराने विवाद को सुलझाने के लिए पूरी तरह तैयार है. नई दिल्ली ने भी स्पष्ट किया है कि वह नेपाल के साथ लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए रचनात्मक बातचीत के लिए हमेशा तैयार है.