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'भारत में कोई ड्रग्स नहीं लेता, कोई बेघर नहीं...', अमेरिकी स्टैंड-अब कॉमेडियन ने भारत को क्यों बताया न्यूयॉर्क से बेहतर

लुईस सीके ने भारत और न्यूयॉर्क की गरीबी की तुलना करते हुए भारतीय सामाजिक ढांचे की सराहना की. उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क की तुलना में भारत में 'फंक्शनिंग पॉवर्टी' है, जहां गरीब लोग भी जीवित रह सकते हैं और संघर्ष कर सकते हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: मशहूर अमेरिकी स्टैंड-अप कॉमेडियन और फिल्म निर्माता लुईस सीके ने हाल ही में अपने 'रिडिकुलस' टूर के तहत भारत का दौरा किया. इस दौरान मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली में उनके शोज हाउसफुल रहे. दौरे के बाद अपने मित्र जिम नॉर्टन के साथ बातचीत में लुईस ने भारत के अनुभवों को साझा किया. उन्होंने विशेष रूप से भारतीय बड़े शहरों में गरीबी के स्वरूप और उसके कामकाज के तरीके पर ध्यान दिया. लुईस की टिप्पणियों ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है.

लुईस ने कहा कि भारत की सड़कों पर न्यूयॉर्क जैसा बुरा हाल नहीं है. वहां न्यूयॉर्क की तरह लोग दिन-दहाड़े ड्रग्स लेते या बेघर अवस्था में नहीं मिलते. लुईस के अनुसार, उन्होंने भारत में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं देखा जो ड्रग्स के नशे में चूर हो या सड़कों पर लावारिस पड़ा हो. भारत में लोग भले ही गरीब हों, लेकिन वे न्यूयॉर्क की तुलना में बेहतर सामाजिक स्थिति में दिखाई देते हैं.

फंक्शनिंग पॉवर्टी का अनोखा सिद्धांत 

लुईस ने 'फंक्शनिंग पॉवर्टी' का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में गरीबी के कई स्तर हैं. वहां लोग कम खर्च में रहने के विकल्प ढूंढ लेते हैं, जैसे तिरपाल और स्टील के ढांचों में रहना. न्यूयॉर्क में अगर कोई तय मानक से नीचे गिरता है, तो उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता. भारत में गरीबी होने के बावजूद सामाजिक ढांचा लोगों को संघर्ष करने और जीवित रहने में मदद करता है.

क्रेडिट रेटिंग और पहचान का संकट 

लुईस ने अमेरिकी तंत्र पर प्रहार करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क में बिना क्रेडिट रेटिंग और पहचान के नौकरी मिलना नामुमकिन है. यदि आप घर नहीं खरीद सकते, तो आप सड़क पर ठंड से मर जाएंगे. भारत में गरीब व्यक्ति भी 'हसल' करके अपना गुजारा कर सकता है. अमेरिका में एक मानक से नीचे गिरने के बाद व्यक्ति को कोई नहीं देखता और वहां पहचान के बिना कोई मौका नहीं मिलता.

सोशल मीडिया पर जोरदार प्रतिक्रिया 

सोशल मीडिया पर लुईस की टिप्पणियों की काफी सराहना हुई. एक यूजर ने कहा कि भारत वह देश है जहां गरीब जीवित रह सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं. लोगों का मानना है कि पिछले दशक में भारत ने बहुत सुधार किया है. कई यूजर्स ने इस बात से सहमति जताई कि भारत में गरीब व्यक्ति पश्चिमी देशों के गरीबों की तुलना में संघर्ष करने के बेहतर अवसर पाता है.

टूर की शानदार सफलता और प्रबंधन 

मार्च में लुईस सीके ने मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली में अपने शोज किए. 'रिडिकुलस' टूर के सभी शोज पूरी तरह से हाउसफुल रहे. यह दौरा न केवल व्यावसायिक रूप से सफल रहा, बल्कि इससे लुईस को भारत के प्रति एक नया नजरिया मिला. अब 'फंक्शनिंग पॉवर्टी' शब्द वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है.