एक कॉल, 30 लाख रुपये और झारखंड का स्कूल, बिहार पुलिस ने यूं सुलझा दी NEET पेपर लीक की गुत्थी
बिहार पुलिस ने कई संदिग्धों के घरों पर छापेमारी की. यह पहला मामला है, जब केंद्रीय एजेंसियों से ज्यादा सक्रिय तरीके से बिहार पुलिस ने काम किया है. 1 महीने से बिहार पुलिस साक्ष्य जुटा रही थी. नीट-यूजी पर बिहार पुलिस ने यह भी कहा था कि हमने पेपर लीक की जानकारी पहले ही एनटीए को दे दी थी. आइए जानते हैं कैसे बिहार पुलिस ने पेपर लीक की सारी गुत्थी सुलझाई है.
NEET UG परीक्षा में हुए पेपर लीक की गुत्थी बिहार पुलिस ने पहले ही सुलझा दी थी. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पेपर लीक की वजह से सवालों के घेरे में है. 5 मई को जब परीक्षा हुई थी, तब से ही पेपर लीक की खबरें सामने आ रही हैं. बिहार पुलिस ने पूरे केस से जुड़े कुछ ऐसे साक्ष्य जुटाए हैं, जो एक-एक करके पेपर लीक के सारे गुनहगारों को बेनकाब कर रहे हैं. जिस रैकेट ने पेपर लीक कराया था, उसके सदस्यों से जुड़ी सारी पोल खुल रही है. एक-एक करके सारे गुनहगार पकड़े जा रहे हैं. 24 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में हुई धांधली को पुलिस ने लगभग सुलझा लिया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इकोनॉमिक अफेंस यूनिट (EOU) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल एनएच खान का दावा है कि बिहार पुलिस ने जुटाए गए सभी साक्ष्यों को सीबीआई को सौंप दिया है. उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को भी बिहार पुलिस रिपोर्ट सौंपेगी. पुलिस सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट देगी.
कैसे सुलझी पेपर लीक की गुत्थी?
- झारखंड पुलिस, बिहार पुलिस को एक कॉल करती है. पटना डिविजन अलर्ट हो जाता है. पुलिस से कहा जाता है कि शहर में एक कार घूम रही है, जिसका संबंध NEET-UG के धांधलीबाजों से हैं. ये लोग रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं.
- DIG और पटना के सीनियर सुप्रीडेंट ऑफ पुलिस (SSP) राजीव मिश्रा, अलग-अलग थानों को अलर्ट करते हैं कि संदिग्ध गाड़ी को जल्दी पकड़ें. आनन-फानन में पुलिस कार सीज कर लेती है.
- तीन लोग गिरफ्तार हो जाते है. उनके पास नीट के अलग-अलग एडमिट कार्ड्स होते हैं, पैन कार्ड होता है और पासपोर्ट साइज तस्वीरें होती हैं. पुलिस एक जूनियर इंजीनियर को पकड़ता है. वह दानापुर नगर परिषद में काम करता है.
- इंजीनियर का नाम सिंकदर प्रसाद यादवेंदु है. उसका ड्राइवर बिट्टू कुमार, नीट उम्मीदवार आयुष राज और अखिलेश कुमार भी पकड़े जाते हैं.
- पुलिस पूछताछ करती है. पेपरलीक की बात सामने आती है. शुरुआती जांच में यह पता चलता है कि झारखंड के एक स्कूल से पेपर लीक हुआ है.
- जांच में दो लोगों के नाम सामने आते हैं. पहला संदिग्ध खगड़िया के JDU नेता का बेटा होता है, दूसरा बेंगलुरु का एक IT इंजीनियर अमित आनंद. एक कॉन्ट्रैक्टर भी पकड़ा जाता है.
- पेपर लीक करने के एवज में सबने 30 से 32 लाख रुपये की डिमांड की थी. यादुवेंदु ने 40 लाख रुपये हर कैंडिडेट से मांगे थे.
- जांच के दौरान यह पता चला कि यादवेंदु ने प्ले स्कूल और बॉयज हॉस्टल में कैंडिडेट्स को पटना में पेपर रटवाया था.
पुलिस को क्या-क्या मिला है अब तक?
- DIG राजीव मिश्रा ने खुद कहा है कि पुलिस को आधे जले हुए पेपर बरामद हुए हैं. पुलिस ने जब तलाशी ली तो आधे दर्जन जले हुए पेपर मिले. पुलिस ने उन्हें फॉरेंसिक टीम के पास जांच के लिए भेजा है. फॉरेंसिक टीम को बुकलेट नंबर मिल गया है.
- यादवेंदु खुद आयुष, अनुराग कुमार, शिवनंदन कुमार और अभिषेक कुमार को सेंटर लेकर गया था.
- एग्जामिनेशन सेंटर्स की पहचान हो चुकी है. 4 कैंडिडेट्स को पकड़ लिया गया है. पूछताछ जारी है. EOU ने केस को ले लिया और 5 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है. झारखंड के देवघर से 5 लोग पकड़े गए.
- बिहार EOU के अधिकारियों का कहना है कि NTA की वजह से जांच में देरी हो रही है. 20 जून को सैंपल पेपर सौंपे गए. क्वेश्चन पेपर 4 मई को ही पीडीएफ में भेजे गए थे. झारखंड के हजारीबाग से ये पेपर भेजे गए थे.
- EOU का कहना है कि बॉक्स, लिफाफे और टी-3 सेट पेपर एग्जामिनेशन सेंटर से ही निकले. शुरुआती जांच में यह पता चला कि इसे पीछे से मोड़ दिया गया था और ये असली शीट की तरह ही थे. दो बॉक्सेज को तोड़ा गया था.
- एग्जाम सेंटर के सुप्रिटेंडेंट ने कहा है कि डिजिटल लॉक दोनों बॉक्सेज के खोले नहीं जा सके. टेक्निकल इश्यू था, इसलिए उन्हें तोड़ना पड़ा.
- अब इस केस की जांच बिहार पुलिस नहीं, CBI कर रही है. 25 जून को पुलिस ने केस हैंडओवर कर लिया है. अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
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