NEET-PG 2024: सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को होने वाली नीट पीजी परीक्षा को स्थगित करने की याचिका को खारिज कर दिया है. यह निर्णय हजारों मेडिकल छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि परीक्षा की तारीख में अचानक बदलाव और परीक्षा केंद्रों की जानकारी देरी से जारी किए जाने के कारण छात्रों को काफी परेशानी हुई है.
कई छात्रों को यात्रा की व्यवस्था करने और रहने की जगह ढूंढने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा, परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करने से प्रश्न पत्रों की समानता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया. अदालत का मानना है कि परीक्षा स्थगित करने से दो लाख से अधिक छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाएगा.
पीठ ने कहा,"हम ऐसी परीक्षा कैसे स्थगित कर सकते हैं. श्री संजय हेगड़े, आजकल लोग परीक्षा स्थगित करने की मांग करते हैं. यह एक आदर्श दुनिया नहीं है. हम अकादमिक विशेषज्ञ नहीं हैं. सिद्धांत के रूप में, हम परीक्षा को पुनर्निर्धारित नहीं करेंगे. दो लाख छात्र और चार लाख माता-पिता हैं जो सप्ताहांत में रोएंगे यदि हम इसे स्थगित कर देते हैं. हम इतने सारे उम्मीदवारों के करियर को खतरे में नहीं डाल सकते. हमें नहीं पता कि इन याचिकाओं के पीछे कौन है."
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET)-स्नातकोत्तर परीक्षा, जो मूल रूप से 23 जून को निर्धारित की गई थी, को अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद "सावधानीपूर्वक उपाय" के रूप में पहले ही स्थगित कर दिया गया था.
परीक्षा की तारीख को लेकर छात्रों ने कई मुद्दे उठाए थे. सबसे पहले, परीक्षा शहरों की सूची 31 जुलाई को जारी की गई थी, जिससे छात्रों को यात्रा की व्यवस्था करने के लिए बहुत कम समय मिला. हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी और ट्रेन टिकटों की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया.
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा परीक्षा को दो बैचों में आयोजित करने का था. छात्रों का मानना था कि इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं. विभिन्न सेटों में प्रश्नों के स्तर में अंतर होने की आशंका को देखते हुए छात्रों ने परीक्षा को एक ही बैच में आयोजित करने की मांग की थी. साथ ही, परीक्षा में अपनाए जाने वाले नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को भी पारदर्शी तरीके से जारी करने की मांग की गई थी.
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में होने वाली कठिनाइयों और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से कई छात्रों को नुकसान हो सकता है.
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) अनस तनवीर ने तर्क दिया कि पारदर्शिता की कमी और दूर परीक्षा सेंटर्स तक पहुंचने और रहने की चुनौतियों से कई छात्रों को नुकसान हो सकता है. याचिकाकर्ताओं में से एक, विशाल सोरेन ने सुझाव दिया कि परीक्षा का एक ही बैच में आयोजित किया जाना चाहिए ताकि सभी उम्मीदवारों के लिए एक समान परीक्षण वातावरण सुनिश्चित हो सके.