संसद से पहले बड़ा सियासी संकेत, शरद पवार गुट महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का कर सकती है समर्थन

सूत्रों के अनुसार शरद पवार गुट संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकता है, लेकिन एनडीए में शामिल होने की योजना नहीं है.

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Km Jaya

महाराष्ट्र: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार शरद पवार के नेतृत्व वाला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गुट महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकता है. हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने की संभावना फिलहाल नहीं बताई जा रही है. माना जा रहा है कि पार्टी इन दोनों विधेयकों पर मुद्दा आधारित समर्थन की रणनीति अपना सकती है.

सूत्रों के मुताबिक शरद पवार गुट सरकार को केवल इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन देगा और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखेगा. पार्टी के पास वर्तमान में लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल आठ सांसद हैं. ऐसे में इन विधेयकों पर उसका रुख राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.

क्यों लिया गया फैसला?

जानकारी के अनुसार पार्टी के भीतर कुछ नेता केंद्र सरकार के साथ अधिक सहयोग की पैरवी कर रहे थे. वहीं नेतृत्व ने सीमित समर्थन की नीति अपनाने का फैसला किया है ताकि संगठन के भीतर मतभेद कम रहें और किसी संभावित टूट की स्थिति से बचा जा सके. इस रणनीति को राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.


यदि शरद पवार गुट इन दोनों विधेयकों का समर्थन करता है तो इससे सरकार को संसद में अतिरिक्त राजनीतिक समर्थन मिल सकता है. हालांकि पार्टी औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा नहीं बनेगी. राजनीतिक जानकार इसे मुद्दों के आधार पर सहयोग की नई रणनीति मान रहे हैं.

साल 2023 में क्या हुआ था?

साल 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी, जब अजित पवार और उनके समर्थक विधायक तथा सांसद अलग होकर सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ चले गए थे. इसके बाद से शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व में पार्टी के दो अलग गुट सक्रिय हैं.

क्या हो रही चर्चाएं?

इसी बीच मंगलवार देर रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास पर हुई बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है. अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. इसके बाद शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे.

हालांकि इन बैठकों के एजेंडे को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. इससे राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं. कुछ लोग इसे दोनों गुटों के बीच दूरी कम करने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं.

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है. सरकार इस दौरान संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है. ऐसे में शरद पवार गुट का रुख संसद की कार्यवाही के दौरान विशेष महत्व रखेगा.