मुजफ्फराबाद मार्च से पहले फायरिंग, 8 की मौत के बाद पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ तेज हुआ PoK जनविद्रोह

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मुजफ्फराबाद की ओर निकाले जा रहे बड़े जन मार्च से पहले हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, सैकड़ों गिरफ्तारियां, इंटरनेट बंदी और कर्फ्यू के बीच आंदोलन अब महंगाई के मुद्दे से आगे बढ़कर पाकिस्तान के शासन के खिलाफ खुली चुनौती बनता नजर आ रहा है.

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Shanu Sharma

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में बुधवार को होने वाला मुजफ्फराबाद जन मार्च पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है.

मिली जानकारी के मुताबिक मार्च ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसा में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए. स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन किसी भी कीमत पर लोगों को मुजफ्फराबाद पहुंचने से रोकना चाहता है. हालांकि इस बार पीओके के लोग मानने के लिए तैयार नही हैं.

प्रदर्शनकारियों पर पाक सैनिकों की फायरिंग

रावलकोट बस अड्डे पर मंगलवार को हजारों लोग एकत्र हुए थे. शुरुआत में सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर कथित तौर पर सीधे गोलीबारी की गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान महिलाएं और बच्चे भी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रावलकोट, मुजफ्फराबाद, बाग, कोटली, मीरपुर, हट्टियां बाला और सुधानोटी समेत कई जिलों में एक साथ सख्त कार्रवाई की गई ताकि प्रदर्शनकारी राजधानी की ओर न बढ़ सकें.


इंटरनेट सेवाएं बंद और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग

आंदोलन के बीच कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. प्रमुख सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है और कई स्थानों पर कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू होने की खबर है. साथ ही खाने-पीने की वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने के भी दावे सामने आए हैं. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर पाकिस्तान ने प्रतिबंध लगा दिया है. संगठन के प्रमुख शौकत नवाज मीर सहित 600 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किए जाने की बात कही जा रही है.

करीब 40 दिनों से जारी यह आंदोलन शुरुआत में महंगाई, महंगी बिजली, गेहूं की कीमतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर केंद्रित था. बाद में आंदोलन ने राजनीतिक स्वरूप ले लिया. JAAC ने 38 सूत्री मांग पत्र सौंपा है, जिसमें सस्ती बिजली, रोजगार, बेहतर प्रशासन और दमनकारी नीतियों को समाप्त करने जैसी मांगें शामिल हैं.