नौकरी गंवा चुकी शिक्षिका को ममता ने थमाया MLA का टिकट, दिलचस्प हुआ नंदीग्राम का रण

नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी के उतरने की अटकलों पर अब विराम लग गया है. टीएमसी ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है. इसके साथ विधानसभा में ममता की वापसी की संभावना टल गई है.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे असंतोष के बीच माना जा रहा था कि ममता बनर्जी नंदीग्राम उपचुनाव लड़कर विधानसभा में वापसी कर सकती हैं. हालांकि पार्टी ने रविवार को संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार घोषित कर इन चर्चाओं को खत्म कर दिया. नंदीग्राम और रेजीनगर में अक्टूबर के पहले सप्ताह में उपचुनाव प्रस्तावित हैं, जो बीजेपी और टीएमसी के बीच अगली राजनीतिक परीक्षा होगी.

टीएमसी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा है. पार्टी के इस फैसले से साफ हो गया कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ेंगी. करीब 15 साल बाद ऐसा होगा, जब वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूद नहीं होंगी. ममता की पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए कहा कि दोनों प्रत्याशी जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे.

अखिल गिरी के नाम की भी थी चर्चा

ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर पूर्व मंत्री अखिल गिरी की हालिया मुलाकात के बाद उनके नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की चर्चा भी तेज हुई थी. राजनीतिक गलियारों में उन्हें संभावित दावेदार माना जा रहा था. लेकिन पार्टी ने अनुभवी नेता के बजाय संचिता डे जैसे अपेक्षाकृत नए चेहरे पर भरोसा किया. नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी और टीएमसी के बीच दूसरी चुनावी भिड़ंत होंगे.


नंदीग्राम का ममता की राजनीति में खास महत्व

नंदीग्राम ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा का बेहद अहम हिस्सा रहा है. 2007 के नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें राज्य की राजनीति में बड़ी ताकत दी और 2011 में टीएमसी की सत्ता में वापसी की राह बनी. 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने बीजेपी छोड़कर आए पवित्र कर को सुवेंदु अधिकारी के सामने उतारा था. संचिता डे उसी मतदान केंद्र की मतदाता हैं, जहां पवित्र कर का भी नाम दर्ज है.

शिक्षक से उम्मीदवार तक का सफर

संचिता डे नंदीग्राम के बोयाल प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं और उनकी उम्र चालीस के आसपास बताई गई है. शिक्षक भर्ती मामले में 26 हजार नियुक्तियां रद्द होने के बाद उनकी नौकरी भी चली गई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें दोबारा नियुक्ति मिली. वह 2018 से 2023 तक पंचायत समिति की सदस्य रहीं. संचित 2008 से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ी हुई हैं. उनके चयन को पार्टी की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

सुवेंदु अधिकारी ने खाली की नंदीग्राम सीट

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी. नियम के अनुसार उन्हें एक सीट छोड़नी थी. अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली कर दी, जिसके बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी. अब टीएमसी ने संचित डे को मैदान में उतारा है. ममता के खुद चुनाव लड़ने की संभावना खत्म होने के बाद नंदीग्राम का मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के लिए खासा महत्वपूर्ण हो गया है.