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ये कैसा इंसाफ: जिस लड़के ने नाबालिग लड़की को छेड़ा, उसे कोर्ट ने दी बेल, 'फैमिली बैकग्राउंड' बना आधार

नाबालिगों के जुर्म करने पर कानून जो सजा देता है उस पर विधि विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं. कुछ नाबालिग जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं फिर भी उन्हें छूट मिल जाती है. अदालतें, नाबालिगों पर रहम करती हैं, जिस पर सवाल उठते हैं.

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महाराष्ट्र के पुणे में एक नाबालिग और अमीरजादे युवक ने दो लोगों को पोर्शे कार से रौंद डाला था. उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने एक निबंध लिखने और ट्रांसपोर्ट ऑफिस में जाकर सीखने की बात कहकर जमानत दे दी थी, अब ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश से भी सामने आया है, जब नाबालिग ने गंभीर अपराध किया है, फिर भी उसे जमानत मिली है. आरोप भी ऐसे-वैसे नहीं, पॉक्सो के हैं. 

मध्य प्रदेश के एक कॉलेज में पढ़ने वाला युवक एक लड़की का लगातार पीछा कर रहा था. हाई कोर्ट ने उसे 2 महीने के लिए जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि वह एक अच्छे परिवारिक पृष्ठभूमि से आता है. कोर्ट ने उसके लिए जमानत की शर्त इस आधार पर दी है कि उसे एक भोपाल के एक अस्पताल में सेवाएं देनी होंगी.

आरोप गंभीर लेकिन मिलना चाहिए एक और मौका
जस्टिस आनंद पाठक की अदालत ने मई 16 के आदेश में कहा है कि उस पर पॉक्सो के लगे केस गंभीर हैं लेकिन उसे एक मौका और मिलना चाहिए. नाबालिग पर यौन उत्पीड़न का गंभीर केस चल रहा है, उसके बाद भी उसे जमानत मिल जाती है. पुलिस ने नाबालिग को 4 अप्रैल को गिरफ्तार किया था, वह एक लड़की को बार-बार उत्पीड़ित कर रहा था. वह लड़की को वॉट्सऐप कर रहा था, उसे कॉल करके भद्दी-भद्दी बातें करता था. 

जमानत की शर्त अस्पताल में करो सेवा
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने छात्र पर दर्ज हुए मुकदमे के बाद हर शनिवार और रविवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक भोपाल जिला अस्पताल में काम करने का आदेश दिया है. उसकी जमानत की शर्त यह है कि वह डॉक्टर औरं कंपाउडरों की मदद करेगा, जिससे बाहर से आने वाले मरीजों की मदद हो सके.

युवक ने अदालत में कहा क्या?
अस्थाई जमानत की अर्जी देने वाले युवक ने अपनी याचिका में कहा है कि अगर वह लंबे समय तक जेल में रहा तो उसकी पढ़ाई बाधित होगी. युवक के वकील ने कोर्ट से यह कहा कि वह अच्छा इंसान बनेगा, ऐसा दोबारा कुछ नहीं करेगा. वह मेहनत करेगा. अब ह किसी का उत्पीड़न नहीं करेगा.  

युवक ने किया क्या था?
युवक के अभिभावकों ने भी कोर्ट से कहा कि उनके बेटे ने जो किया है, उसके लिए शर्मिंदा हैं और वादा करते हैं ऐसा दोबारा कभी रिपीट नहीं होगा. बेल का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि युवक ने लगातार नाबालिग का उत्पीड़न किया है, उसे वॉट्सऐप किया है, उसका पीछा किया है और गंदी बातचीत की है. 

'अच्छा फैमिली बैकग्राउंड' बना जमानत का आधार
कोर्ट ने कहा, 'सभी पक्षों को जानने के बाद और पक्षों के जवाब जानने के बाद यह तय हुआ है कि आरोप बेहद संगीन और भद्दे हैं. एक ऐसे स्टूडेंट ने यह किया है, जिसे भविष्य में मेनेजरियर कैडर में काम करना है, जो एक अच्छे परिवार से आता है, एक बीबीए से स्टूडेंट से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है.'